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राष्ट्रपति मुर्मु ने की INS वाघषीर में यात्रा :नौसेना चीफ भी रहे मौजूद, कलाम के बाद यात्रा करने वाली दूसरी राष्ट्रपति

INS वाघषीर में 4 MTU 12V 396 SE84 डीजल इंजन और 360 हाई-कैपेसिटी बैटरी सेल्स लगाए गए हैं। यह पनडुब्बी पानी की सतह पर लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटा और पानी के भीतर 37 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से चल सकती है। 
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नौसेना चीफ भी रहे मौजूद, कलाम के बाद यात्रा करने वाली दूसरी राष्ट्रपति
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कारवाड़। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु रविवार को कर्नाटक दौरे पर आई हैं। यहां उन्होंने कारवाड़ नेवल बेस पर पनडुब्बी में यात्रा की है। उनकी यह यात्रा कलवरी क्लास में हुई है। मुर्मु के साथ सबमरीन में सेना प्रमुख एडमिरल के त्रिपाठी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति की सबमरीन में यह पहली यात्रा है। उनसे पहले राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पनडुब्बी में बैठे थे।

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    फाइटर जेट्स में भी बैठ चुकी राष्ट्रपति

    पनडुब्बी में सवार होने से पहले राष्ट्रपति मुर्मु दो फाइटर जेट्स में भी उड़ान भर चुकी है। वे ऐसा करने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं है। जहां इस साल 29 अक्टूबर को राफेल और 2023 में सुखोई MKI में बैठी थी।

    किस सबमरीन में बैठे थे कलाम

    भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम सबमरीन में सवार होने वाले पहले भारतीय राष्ट्रध्यक्ष बने थे। बता दें डॉ. कलाम 13 फरवरी 2006 को ईस्टर्न नेवल कमांड के तहत विशाखापट्टनम में पनडुब्बी में कुछ घंटों के बंगाल की खाड़ी में रहे थे। यहां उनके साथ तत्कालीन नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश भी थे। वहीं पनडुब्बी की कमान कमांडक पीएस बिष्ट संभाल रहे थे।

    वहीं इस यात्रा के बाद डॉ. कलाम ने पत्रकारों से कहा था " पानी के अंदर सबमरीन में अनुभव करना यह मेरी पहली यात्रा है। मैंने यहां सीखा कि जब पानी के अंदर भारतीय नौसेना दल की साइलेंट फोर्स होती है तो वह कैसे काम करती है।

    एक नजर INS वाघषीर पर

    स्कॉरपीन यानी कलवारी क्लास की अत्याधुनिक पनडुब्बी INS वाघषीर को चार साल पहले मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड से प्रोजेक्ट-75 के तहत लॉन्च किया गया था।

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    यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है, जिसे बेहद आधुनिक नेविगेशन, सेंसर और ट्रैकिंग सिस्टम्स से लैस किया गया है। अपनी कम आवाज और घातक मारक क्षमता के कारण इसे भारतीय नौसेना की ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है।

    प्रोजेक्ट-75 के तहत भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पांच अत्याधुनिक पनडुब्बियों को नौसेना के बेड़े में शामिल किया है। INS वाघषीर इस श्रृंखला की आखिरी पनडुब्बी है, जिसने भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर स्ट्राइक क्षमता को नई मजबूती दी है। 

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    कई खासियतों से लैस है INS वाघषीर 

    INS वाघषीर में 4 MTU 12V 396 SE84 डीजल इंजन और 360 हाई-कैपेसिटी बैटरी सेल्स लगाए गए हैं। यह पनडुब्बी पानी की सतह पर लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटा और पानी के भीतर 37 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से चल सकती है। इसकी रेंज गति पर निर्भर करती है।

    यदि यह सतह पर 15 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है, तो लगभग 12,000 किलोमीटर तक सफर कर सकती है। वहीं, पानी के भीतर 7.4 किमी प्रति घंटा की गति पर यह करीब 1,020 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। कलवारी क्लास की इस पनडुब्बी की लंबाई लगभग 221 फीट, बीम 20 फीट और ऊंचाई करीब 40 फीट है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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