Peoples Update Special :आयकर अफसर और टैक्स पेयर्स भी सीखेंगे नए आईटी कानून की बारीकियां

राजीव सोनी,भोपाल। नया साल 2026 आयकर विभाग में साढ़े छह दशक बाद कानून में बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) के निर्देश पर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी राज्यों में 1 जनवरी से 31 मार्च तक न्यू आईटी एक्ट की ब्रांडिंग के लिए विशेष मुहिम शुरू होगी।
दो राज्यों में 80 कार्यक्रम
नए कानून में तलाशी और जब्ती के दौरान डिजीटल डाटा हासिल करने अधिकारियों के पॉवर बढ़ गए हैं। फोन, लैपटॉप अथवा ऑनलाइन खातों के पासवर्ड-एक्सेस कोड भी साझा करने होंगे। दोनों राज्यों में 80 स्थानों पर पब्लिक के लिए नए कानून को समझाने के कार्यक्रम होंगे।
टैक्स विवादों में कमी आने की उम्मीद बढ़ी
विभागीय सूत्रों का कहना है कि नए कानून से टैक्स विवादों में कमी आएगी। यह पहला मौका है जब विभाग ने देश के सभी राज्यों में एक साथ 3 महीने तक स्टाफ ट्रेनिंग के साथ टैक्स पेयर्स के लिए भी कार्यक्रम तैयार किया है। पिछले महीने भोपाल में सीबीडीटी चेयरमैन व मेंबर्स सहित देश भर के अधिकारियों ने नए एक्ट की बारीकियां पापुलराइज करने कई नवाचारों पर काम शुरू किया है। तीन महीने विभाग ने मप्र-छग के बड़े शहरों सहित विभिन्न जिलों में 80 स्थान चिन्हित किए हैं।
ये हैं नए कानून की खूबियां
- कानून की भाषा सरल और आसान।
- आयकर की धाराएं 800 से घटकर 536 की गई हैं।
- 47 अध्याय का एक्ट अब 23 अध्याय में सिमटा।
- 1200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण हुए डिलीट।
- कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में भी हुए बदलाव।
- विदेश में पैसे भेजने की सीमा 7 से बढ़ाकर 10 लाख।
- मांगने पर डिजीटल डाटा के देना होंगे पासवर्ड।
- सीनियर सिटीजंस को बैंक/डाकघर से ब्याज की आय पर टैक्स की छूट 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख की।
- अपडेट आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा 2 से 4 साल हुई।
- कर चोरी पकड़ने बक्से, लॉकर, अलमारी आदि का ताला तोड़ सकेंगे।
एक अप्रैल 2025 से नई व्यवस्था शुरू हुई
संसद ने अगस्त 2025 में नया आयकर अधिनियम-2025 पारित कर दिया है। नया कानून अब 1 अप्रैल 2026 से पुराने आयकर कानून-1961 का स्थान ले लेगा। कंप्यूटर के एक्सेस कोड को ओवरराइड कर सकते हैं।
नया कानून ज्यादा सरल व विधि संगत
आयकर का नया कानून कई दृष्टि से ज्यादा सरल और विधि संगत हो गया है। सराहनीय बदलावों व पारदर्शिता से समय और धन की बचत होगी। एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग आदेश पारित नहीं हो पाएंगे।
डॉ. आरएन सिंह, टैक्स विशेषज्ञ





















