PU Special :मध्यप्रदेश के 22 बड़े जल-सीवर प्रोजेक्ट लक्ष्य से पीछे, 6,113 करोड़ की योजनाओं पर धीमी रफ्तार का असर

मध्यप्रदेश में 100 करोड़ से अधिक लागत वाली 25 बड़ी जल और सीवर परियोजनाओं में 22 लक्ष्य से पीछे चल रही हैं। 6,113.05 करोड़ रुपये की योजनाओं की धीमी रफ्तार से कई शहरों में लोग परेशान हैं।
मध्यप्रदेश के 22 बड़े जल-सीवर प्रोजेक्ट लक्ष्य से पीछे, 6,113 करोड़ की योजनाओं पर धीमी रफ्तार का असर
मध्यप्रदेश के 22 बड़े जल-सीवर प्रोजेक्ट लक्ष्य से पीछे

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चल रही बड़ी परियोजनाओं की रफ्तार सवालों के घेरे में है। प्रदेश में 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 25 प्रमुख जल और सीवर परियोजनाओं में से 22 परियोजनाएं तय भौतिक लक्ष्य से पीछे चल रही हैं। इन 25 परियोजनाओं की कुल लागत 6,791.31 करोड़ रुपये है। इनमें से करीब 90 प्रतिशत राशि यानी 6,113.05 करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले पिछड़ रही हैं। कई शहरों में परियोजनाओं के तहत सड़कें खोदी गई हैं, लेकिन समय पर री-रेस्टोरेशन नहीं होने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खंडवा के कसालपुरा से लेकर भोपाल की अरेरा कॉलोनी तक कई इलाकों में सड़क खुदाई के बाद गड्ढे और धूल लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। ज्यादातर परियोजनाओं को वर्ष 2027 से 2028 के बीच पूरा किया जाना है। मौजूदा प्रगति को देखते हुए तय समय-सीमा में काम पूरा करना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

इंदौर के सभी 6 प्रोजेक्ट लक्ष्य से पीछे

बड़े जल और सीवर प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार के मामले में इंदौर की स्थिति प्रमुखता से सामने आई है। शहर में कुल 1,879.16 करोड़ रुपये की लागत से छह पैकेज पर काम चल रहा है और सभी छह परियोजनाएं अपने तय लक्ष्य से पीछे हैं। वॉटर सप्लाई पैकेज-1 में तय लक्ष्य 30 प्रतिशत था जबकि अब तक केवल 18.49 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। इसी तरह वॉटर सप्लाई पैकेज-2 में 7 प्रतिशत प्रगति का लक्ष्य रखा गया था लेकिन काम सिर्फ 1 प्रतिशत तक पहुंच पाया है। इस तरह इंदौर में बड़े पैमाने पर चल रही जलापूर्ति संबंधी योजनाओं में लक्ष्य और वास्तविक प्रगति के बीच काफी अंतर दिखाई दे रहा है।

भोपाल के 1,537 करोड़ के चार प्रोजेक्ट पिछड़े

राजधानी भोपाल में भी बड़े जल और सीवर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नहीं है। यहां कुल 1,537.44 करोड़ रुपये की लागत वाले चार बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं और चारों की भौतिक प्रगति लक्ष्य से पीछे है। सीवरेज पैकेज-2 में 19 प्रतिशत काम पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन अब तक 8.1 प्रतिशत प्रगति हुई है। वहीं सीवरेज पैकेज-3 के लिए 49 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित था जबकि वास्तविक काम 35.1 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। राजधानी में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों के बीच सीवर परियोजनाओं की धीमी गति का असर आम लोगों के आवागमन पर भी पड़ रहा है।

ग्वालियर के दोनों प्रोजेक्ट भी सुस्त

ग्वालियर में 932.44 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे दोनों बड़े प्रोजेक्ट भी निर्धारित लक्ष्य से पीछे हैं। इनमें पैकेज-1 में 100 प्रतिशत भौतिक प्रगति का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी तक सिर्फ 45 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। ग्वालियर में दोनों परियोजनाओं की धीमी प्रगति को देखते हुए तय समय में काम पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।

जबलपुर में 85 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 34 प्रतिशत काम

जबलपुर में 312.10 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट की प्रगति भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं है। परियोजना के लिए 85 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित था, जबकि अब तक केवल 34 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है।

इसी तरह पीथमपुर में भी परियोजना की रफ्तार धीमी है। यहां 44 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले केवल 15.35 प्रतिशत काम पूरा हुआ है।

25 में सिर्फ 3 प्रोजेक्ट लक्ष्य के बराबर या आगे

बड़े जल और सीवर प्रोजेक्ट्स में जहां 22 योजनाएं पीछे चल रही हैं, वहीं 25 में से केवल तीन परियोजनाएं ऐसी हैं जिनकी प्रगति निर्धारित लक्ष्य के बराबर या उससे आगे है।

छतरपुर में 155.50 करोड़ रुपये की परियोजना निर्धारित लक्ष्य के बराबर चल रही है। वहीं उज्जैन के पैकेज-1 में लक्ष्य से अधिक काम हुआ है और इसकी प्रगति 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

खंडवा वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट की स्थिति भी अन्य परियोजनाओं की तुलना में बेहतर है। यहां 100 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले करीब 97 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

12 नगरीय निकायों में बड़े प्रोजेक्ट लक्ष्य से पीछे

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 12 नगरीय निकायों में 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली जल और सीवर परियोजनाओं की भौतिक प्रगति निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में लोगों को बेहतर और नियमित जलापूर्ति उपलब्ध कराना तथा सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करना है। लेकिन काम की धीमी रफ्तार के कारण इन सुविधाओं का लाभ निर्धारित समय पर लोगों तक पहुंचने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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सड़क खुदाई और री-रेस्टोरेशन से बढ़ी परेशानी

जल और सीवर परियोजनाओं के लिए शहरों में सड़कों की खुदाई की जाती है। परियोजना का काम पूरा होने के बाद सड़कों का री-रेस्टोरेशन किया जाना होता है लेकिन कई जगह यह काम समय पर नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। खंडवा के कसालपुरा से लेकर भोपाल की अरेरा कॉलोनी तक सड़क खुदाई और उसके बाद की स्थिति को लेकर आम लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गड्ढों और धूल के कारण आवागमन प्रभावित होने के साथ ही रोजमर्रा की आवाजाही भी मुश्किल हो रही है।

2027-28 तक पूरा होना है अधिकांश काम

प्रदेश की ज्यादातर बड़ी जल और सीवर परियोजनाओं को 2027 और 2028 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि मौजूदा भौतिक प्रगति और निर्धारित लक्ष्य के बीच बड़ा अंतर होने के कारण समय-सीमा को लेकर चुनौती बनी हुई है। खास तौर पर इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की धीमी रफ्तार का सीधा असर निर्माण कार्यों और आम नागरिकों की रोजमर्रा की सुविधाओं पर पड़ रहा है।

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प्रमुख आंकड़े एक नजर में

  • कुल बड़े प्रोजेक्ट: 25
  • प्रत्येक प्रोजेक्ट की लागत: 100 करोड़ रुपये से अधिक
  • कुल परियोजना लागत: 6,791.31 करोड़ रुपये
  • लक्ष्य से पीछे प्रोजेक्ट: 22
  • पिछड़े प्रोजेक्ट्स की कुल लागत: 6,113.05 करोड़ रुपये
  • पिछड़े प्रोजेक्ट वाले नगरीय निकाय: 12
  • लक्ष्य के बराबर या आगे प्रोजेक्ट: 3
  • इंदौर: 6 पैकेज, 1,879.16 करोड़ रुपये; सभी लक्ष्य से पीछे
  • भोपाल: 4 पैकेज, 1,537.44 करोड़ रुपये; सभी पिछड़े
  • ग्वालियर: 2 प्रोजेक्ट, 932.44 करोड़ रुपये; दोनों पिछड़े
  • जबलपुर: 312.10 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट; 85 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 34 प्रतिशत काम
  • पीथमपुर: 44 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 15.35 प्रतिशत काम
  • छतरपुर: 155.50 करोड़ रुपये; लक्ष्य के बराबर
  • उज्जैन पैकेज-1: 60 प्रतिशत प्रगति, निर्धारित लक्ष्य से आगे
  • खंडवा वॉटर सप्लाई: 100 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 97 प्रतिशत काम

जलापूर्ति और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में परियोजनाओं की धीमी रफ्तार के साथ सड़क री-रेस्टोरेशन में देरी लोगों के लिए दोहरी परेशानी बन रही है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं की गति बढ़ाना और तय समय-सीमा में काम पूरा करना संबंधित नगरीय निकायों और एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती होगी।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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