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इंफाल। पूर्वोत्तर भारत का मणिपुर राज्य एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। राज्य के चुराचंदपुर जिले में डिप्टी सीएम नेम्चा किपगेन और लोसी दिखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। मणिपुर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। हिंसा राज्य में नए प्रशासन के गठन के महज 24 घंटे बाद भड़की, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
नई सरकार में कुकी समुदाय के विधायक नेम्चा किपगेन को डिप्टी सीएम बनाए जाने के फैसले से समुदाय के एक बड़े हिस्से में नाराजगी फैली है। उनके साथ एलएम खौटे और न्गुर्संगलुर जैसे अन्य दो कुकी विधायक भी सरकार में शामिल हुए। कुछ संगठन ने विधायकों पर विश्वासघात का आरोप लगाया और उन्हें सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी। समर्थक गुट का कहना है कि, ये विधायक समुदाय की सुरक्षा और विकास के लिए सरकार में शामिल हुए।
हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। तुइबोंग इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाए और पत्थरबाजी की। कुछ समूहों ने सरकार में शामिल तीन कुकी विधायकों को मारने के लिए इनाम का ऐलान भी किया।
विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हालिया हिंसा के तीन मुख्य कारण हैं-
1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जा विवाद
14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर राज्य सरकार को निर्देश दिया। कुकी समुदाय, जो पहले से ST श्रेणी में है, इसे अपने अधिकार और जमीन पर खतरा मानता है। उनका डर है कि मैतेई समुदाय को ST दर्जा मिलने से पहाड़ी इलाकों में उनका सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व प्रभावित होगा।
2. अलग प्रशासन की मांग
कुकी समुदाय कुकीलैंड या जूमलैंड नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहा है। मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इसे राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानते हैं।
3. ड्रग्स तस्करी के आरोप
कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी और अवैध अफीम की खेती में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। इससे सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ा और तनाव और गहरा हुआ।
इंफाल और चुराचंदपुर में हालिया हिंसा ने भारी तबाही मचाई। कई दर्जन चर्च और मंदिरों को आग लगा दी गई, साथ ही सैकड़ों घर और संपत्ति भी जला दी गई। इस दौरान इलाके में सैकड़ों लोग घायल हुए और लगभग 70,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए। हिंसा इतनी व्यापक थी कि भीड़ ने पुलिस से लगभग 6,020 हथियार भी लूट लिए।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए असम राइफल्स को तैनात किया गया। शुरुआती प्रयासों में सुरक्षा बलों को बहुत कम सफलता मिली, लेकिन बाद में आंसू गैस और कड़े नियंत्रण उपायों के जरिए कुछ हद तक स्थिति पर काबू पाया जा सका।
राज्य सरकार और सुरक्षा बलों ने मणिपुर में हिंसा को नियंत्रण में लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, जबकि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, प्रभावित समुदायों के साथ बातचीत और समझौते की कोशिशें भी की गईं।
हालांकि, समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद, जमीन और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद, और जातीय पहचान के मुद्दे स्थिति को जटिल बना रहे हैं। इन वजहों से हिंसा और तनाव को पूरी तरह समाप्त करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं। कुकी समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें 7 भाजपा के हैं। मैतेई और नगा समुदाय भी सरकार के गठबंधन में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री: युमनाम खेमचंद सिंह (भाजपा, मैतेई)
डिप्टी सीएम: नेम्चा किपगेन (कुकी)
डिप्टी सीएम: लोसी दिखो (नगा)
इस गठबंधन में जातीय समीकरण और सांस्कृतिक हित प्रमुख कारण बने हैं।
मणिपुर में जातीय हिंसा का इतिहास गहरा है और यह लंबे समय से राज्य की सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करता रहा है। पिछले 10 महीनों में लगभग 260 लोगों की मौत हुई, 1,500 से अधिक लोग घायल हुए और 70,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। इसके अलावा, राज्य में 10 महीने तक इंटरनेट सेवा बंद रही, जिससे हालात और जटिल हो गए।
हिंसा मुख्य रूप से कुकी और मैतेई समुदायों के बीच केंद्रित रही, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों और इंफाल घाटी में। इस दौरान समुदायों के बीच गहरी नाराजगी और अविश्वास देखने को मिला, जिसने सुरक्षा और प्रशासन के प्रयासों को चुनौती दी।