इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैल रही बीमारी ने एक और परिवार को उजाड़ दिया। हलकूप्रसाद यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे बीते कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर जिंदगी-मौत से जूझ रहे थे। इससे पहले उनकी पत्नी की भी इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। एक ही परिवार में दो मौतों के बाद क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और लोगों के दिलों में डर गहराता जा रहा है। भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद हालत बिगड़ती है और फिर धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जवाब देने लगते हैं। पिछले दिनों हुई मौतों में बुजुर्गों की संख्या अधिक सामने आई है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वार्ड 80 के रहवासी पिछले कई दिनों से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे थे। रहवासियों का आरोप है कि नल खोलते ही शुरुआती 10 से 15 मिनट तक नर्मदा जल के बजाय बदबूदार और गंदा पानी आता था। बार-बार शिकायतों के बाद निगम की टीम हरकत में आई और जांच शुरू की गई। जांच करते हुए निगम की टीम नर्मदा जल वितरण के वाल्व तक पहुंची, जहां खुदाई के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि कुछ रहवासियों ने नर्मदा जल के चैंबर में अपनी निजी ड्रेनेज लाइन जोड़ रखी थी। जैसे ही पानी के लिए वाल्व खोला जाता, ड्रेनेज का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिलकर घरों तक पहुंच जाता था। यही दूषित पानी बीमारी और मौतों की बड़ी वजह बन गया।
निगम की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्रेनेज लाइन को अलग कराया। पार्षद प्रशांत बड़वे ने बताया कि पाराशर नगर के रहवासियों की शिकायत पर जांच की गई थी। जांच में 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास बने नर्मदा वाल्व के चैंबर से बदबूदार पानी बाहर निकलता मिला। खुदाई करने पर पता चला कि पास बने चार मकानों ने अवैध रूप से अपनी निजी ड्रेनेज लाइन इस चैंबर में जोड़ दी थी। पार्षद बड़वे ने आरोप लगाया कि जिन मकानों ने ड्रेनेज लाइन जोड़ी थी, वे ले-आउट में दर्ज ही नहीं हैं और अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं। मामले के सामने आने के बाद इन मकानों के लोगों ने शिकायतकर्ताओं को धमकाना शुरू कर दिया और विवाद की स्थिति पैदा हो गई। फिलहाल ड्रेनेज लाइन हटाने के बाद क्षेत्र में शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है, लेकिन लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, खतरा बना रहेगा।