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Delhi Student Safety App: छात्राओं के लिए बनेगा खास SOS ऐप, एक क्लिक पर पुलिस तक पहुंचेगा अलर्ट; डार्क स्पॉट की होगी पहचान

दिल्ली में छात्राओं की सुरक्षा के लिए खास Student Safety App तैयार किया जा रहा है। इस ऐप में एक क्लिक पर SOS अलर्ट, रियल टाइम लोकेशन शेयरिंग, पुलिस से संपर्क और डार्क स्पॉट की पहचान जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
Delhi Student Safety App: छात्राओं के लिए बनेगा खास SOS ऐप, एक क्लिक पर पुलिस तक पहुंचेगा अलर्ट; डार्क स्पॉट की होगी पहचान
Delhi Student Safety App का उद्देश्य छात्राओं को एक ऐसा डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराना है जहां वे आपात स्थिति में तुरंत मदद मांग सकें और अपने आसपास के असुरक्षित स्थानों की जानकारी साझा कर सकें।

दिल्ली में छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Student Safety App तैयार करने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है। प्रस्तावित ऐप में SOS बटन, रियल टाइम लोकेशन शेयरिंग, पुलिस अलर्ट और डार्क स्पॉट की पहचान जैसी सुविधाएं शामिल की जा सकती हैं। छात्राएं अपने अनुभव के आधार पर असुरक्षित स्थानों की जानकारी भी साझा कर सकेंगी। यह पहल कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। दिल्ली में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही कई डिजिटल और पुलिस सेवाएं मौजूद हैं। दिल्ली पुलिस की डिजिटल सेवाओं में महिलाओं के लिए Himmat Plus App और Sashakti Enrollment जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

एक क्लिक पर पुलिस तक पहुंचेगा SOS अलर्ट

प्रस्तावित Delhi Student Safety App का सबसे अहम फीचर इसका SOS सिस्टम होगा। किसी आपात स्थिति में छात्रा एक क्लिक के जरिए मदद के लिए अलर्ट भेज सकेगी। इस अलर्ट को पुलिस के साथ-साथ छात्रा के परिवार या चुने गए संपर्कों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे किसी घटना के दौरान मदद मांगने में लगने वाला समय कम करने का उद्देश्य है।

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ऐप में मिल सकती हैं ये सुविधाएं

  • एक क्लिक पर SOS अलर्ट
  • रियल टाइम लोकेशन शेयरिंग
  • पुलिस से सीधे जुड़ने की सुविधा
  • परिवार और दोस्तों को आपातकालीन सूचना
  • डार्क स्पॉट की पहचान और रिपोर्टिंग
  • पिंक बूथ की जानकारी
  • संबंधित नोडल अधिकारी से संपर्क
  • ई-रिक्शा, कैब और बस से जुड़ी शिकायत दर्ज करने की सुविधा

छात्राएं खुद बताएंगी कौन-सी जगह है असुरक्षित

इस ऐप की खास बात यह हो सकती है कि डार्क स्पॉट की पहचान में छात्राओं की भागीदारी होगी। छात्राएं अपने अनुभव के आधार पर ऐसे स्थानों की जानकारी भेज सकेंगी जहां उन्हें सुरक्षा संबंधी परेशानी महसूस होती है। इसके बाद संबंधित विभाग उन स्थानों पर स्ट्रीट लाइट, पुलिस गश्त और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सकते हैं। दिल्ली में डार्क स्पॉट को लेकर पहले भी अभियान चलाए गए हैं। एलजी सचिवालय की एक रिपोर्ट में राजधानी में डार्क स्पॉट हटाने और स्ट्रीट लाइटिंग सुधारने के प्रयासों का उल्लेख किया गया था।

कॉलेजों के आसपास बढ़ेगी पुलिस की निगरानी

छात्राओं की सुरक्षा के लिए कॉलेजों और उनके आसपास संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर शाम के समय उन इलाकों की निगरानी बढ़ाने की योजना है जहां छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है। पार्क, कॉलेज के आसपास की सड़कें, टैक्सी स्टैंड, सार्वजनिक शौचालय और सुनसान जगहों को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से देखा जाएगा।
छात्राओं की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई के लिए हर कॉलेज में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की योजना है।

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ई-रिक्शा, कैब और बस चालकों की भी होगी शिकायत

छात्राओं की सुरक्षा सिर्फ कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं है। कॉलेज आने-जाने के दौरान सार्वजनिक परिवहन और निजी कैब या ई-रिक्शा का इस्तेमाल भी छात्राएं करती हैं। इसी वजह से प्रस्तावित ऐप में ई-रिक्शा, कैब या बस चालक के दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में वाहन की जानकारी, स्थान और घटना से संबंधित विवरण दर्ज किया जा सकता है, जिससे संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए जानकारी मिल सके।

पिंक बूथ और पुलिस से कनेक्टिविटी पर जोर

छात्राओं को आसपास मौजूद पुलिस सहायता केंद्रों और पिंक बूथ की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। आपात स्थिति में छात्रा को यह पता होना जरूरी है कि सबसे नजदीकी सहायता केंद्र कहां है। ऐप के जरिए पुलिस और सुरक्षा तंत्र से सीधे संपर्क की व्यवस्था होने पर किसी घटना की जानकारी जल्दी साझा की जा सकेगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस पहले से ही कई डिजिटल सेवाएं संचालित करती है। केंद्र सरकार की ओर से भी दिल्ली पुलिस की डिजिटल सेवाओं में महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।

हर 15 दिन में होगी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े कदमों की नियमित समीक्षा करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में हर 15 दिन में सुरक्षा से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जा सकती है। इसमें यह देखा जा सकता है कि कितने डार्क स्पॉट की पहचान हुई, कितनी जगहों पर लाइटिंग सुधारी गई और पुलिस गश्त या अन्य सुरक्षा उपायों में क्या बदलाव किए गए।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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