दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर एक्शन! आज से PUC बिना नहीं मिलेगा ईंधन, आज से सख्त नियम लागू

नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में सर्दियों के साथ बढ़ने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इस बार पहले से कदम उठाए जा रहे हैं। बुधवार को दिल्ली का AQI 129 दर्ज हुआ, जिसके बाद संशोधित GRAP व्यवस्था के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। अब प्रशासन सिर्फ प्रदूषण का स्तर बढ़ने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए भी जरूरी पाबंदियां लागू की जा सकेंगी। 1 अक्टूबर से वाहन चालकों के लिए PUC प्रमाणपत्र बेहद जरूरी हो गया है। बिना वैध प्रमाणपत्र के पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। आने वाले महीनों में वाहनों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर भी नियम सख्त होंगे।
PUC नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं
दिल्ली-NCR में 1 अक्टूबर से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र यानी PUC वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। पेट्रोल पंपों पर वाहनों का PUC चेक किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए भी जांच की व्यवस्था की गई है। नियम तोड़ने पर वाहन मालिक पर कार्रवाई और जुर्माना हो सकता है।
प्रदूषण बढ़ने से पहले ही शुरू होगी कार्रवाई
संशोधित GRAP व्यवस्था में एक अहम बदलाव किया गया है। अब हवा खराब होने के बाद पाबंदी लगाने के बजाय मौसम के अनुमान को भी ध्यान में रखा जा सकेगा। इसका मकसद प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले नियंत्रित करना है। GRAP और दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान इस दौरान साथ-साथ लागू रहेगा।
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नवंबर से पुराने वाहनों पर सख्ती
1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में BS-IV और उससे पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों की आवाजाही पर सख्ती का प्रावधान है। इस अवधि में BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर अलग नियम लागू होंगे। इसके अलावा निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के लिए भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
आने वाले सालों में EV पर बढ़ेगा जोर
वाहनों से जुड़े नियमों में आने वाले वर्षों में भी बदलाव तय किए गए हैं। दिल्ली में 2027 से नए ई-ऑटो के पंजीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। इसके बाद NCR के अलग-अलग इलाकों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण से जुड़े नियम चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। दोपहिया और व्यावसायिक वाहनों के लिए भी इलेक्ट्रिक विकल्पों पर जोर दिया जाएगा।
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डीजल जनरेटर और निर्माण कार्यों पर नजर
प्रदूषण बढ़ाने वाले स्रोतों पर निगरानी के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल और निर्माण गतिविधियों को लेकर नियमों का पालन जरूरी होगा। अधिकारियों की नजर धूल उड़ाने वाले कामों पर भी रहेगी। 1 अक्टूबर से फरवरी के अंत तक अलग-अलग चरणों में नियम लागू रहेंगे, जबकि नवंबर से जनवरी के बीच ज्यादा सख्ती देखने को मिलेगी।




















