हाईकोर्ट ने साफ की संवैधानिक स्थिति, नई नियक्ति होने तक पद पर बने रहेंगे राज्यपाल

जबलपुर। राज्य की संवैधानिक स्थिति को लेकर मप्र हाईकोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि नई नियुक्ति होने तक मंगू भाई पटेल ही राज्यपाल बने रहेंगे। नई नियुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार को जरूरी निर्देश देने की मांग करते हुए दायर की गई जनहित याचिका खारिज करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने स्पष्ट किया है कि संविधान के प्रावधानों के तहत राज्यपाल का पद कभी खाली नहीं रह सकता।
पांच साल का कार्यकाल पूरा होने का दिया था तर्क
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वर्तमान राज्यपाल मंगू भाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए उन्हें तुरंत हटाया जाए और उनकी जगह नई नियुक्ति होने तक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को फिलहाल कार्यवाहक राज्यपाल नियुक्त किया जाए। मामले में 15 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी की दलीलों को सुनकर बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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उत्तराधिकारी के पद ग्रहण तक पद पर रहेंगे राज्यपाल
मामले पर सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 156(3) के तहत राज्यपाल का कार्यकाल भले ही 5 वर्ष का हो, लेकिन वे अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक अपने पद पर बने रहेंगे।
संवैधानिक पद पर शून्यता न रहे, इसलिए प्रावधान
बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए साफ किया कि यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है, ताकि राज्य में कभी भी संवैधानिक पदों पर कोई शून्यता या वैक्यूम की स्थिति न बने।
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