Kanker:कांकेर में मादा भालू का कहर: दो सगे भाई-बहन की मौत, तीसरी बहन जिंदगी की जंग लड़ रही,4 घंटे बाद काबू में आया भालू

शावक की मौत के बाद आक्रामक हुई मादा भालू, शवों के पास चार घंटे तक डटी रही; विशेषज्ञ टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन से किया रेस्क्यू,जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले में एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहन शिकार बने। इनमें दो की मौके पर मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन गंभीर रूप से घायल है और कांकेर मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
कांकेर में मादा भालू का कहर: दो सगे भाई-बहन की मौत, तीसरी बहन जिंदगी की जंग लड़ रही,4 घंटे बाद काबू में आया भालू

कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। खेत के पास बैठे एक व्यक्ति पर भालू ने हमला किया, उन्हें बचाने पहुंचीं उनकी दो बहनों पर भी भालू टूट पड़ी। इस दर्दनाक घटना में दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और दहशत का माहौल है।

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कांकेर में दर्दनाक हादसा

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले में एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहन शिकार बने। इनमें दो की मौके पर मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन गंभीर रूप से घायल है और कांकेर मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।

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पहले भाई पर किया हमला

जानकारी के अनुसार हलाल खोर जुर्री खेत के पास बैठे थे। इसी दौरान मादा भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया। वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े और मदद के लिए चिल्लाने लगे।

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बचाने पहुंचीं बहनें भी बनीं शिकार

भाई की आवाज सुनकर स्कूल से लौट रही उनकी बहन चमारोन बाई मौके पर पहुंचीं। उन्होंने भाई को बचाने की कोशिश की, लेकिन भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। इसके बाद खेत में काम कर रही दूसरी बहन खोरीनबाई भी पहुंचीं, लेकिन वह भी भालू के हमले का शिकार हो गईं। इस हमले में हलाल खोर जुर्री और चमारोन बाई की मौत हो गई, जबकि खोरीनबाई गंभीर रूप से घायल हो गईं।

चार घंटे तक शवों के पास डटी रही भालू

घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती दोनों शवों को बाहर निकालने की थी। मादा भालू शवों के पास बैठी रही और जैसे ही कोई पास पहुंचने की कोशिश करता, वह हमला करने दौड़ पड़ती। पुलिस, वन विभाग और ग्रामीण कई घंटे तक शव नहीं निकाल सके।

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विशेषज्ञ टीम ने किया रेस्क्यू

करीब चार घंटे बाद रायपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से मादा भालू को बेहोश किया। इसके बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में बंद कर कांकेर लाया गया। तब जाकर दोनों मृतकों के शव बाहर निकाले जा सके।

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शावक की मौत के बाद बढ़ी आक्रामकता

ग्रामीणों का दावा है कि एक दिन पहले मादा भालू के शावक की मौत हो गई थी। वन विभाग शावक का शव अपने साथ ले गया था। ग्रामीणों का मानना है कि इसी कारण मादा भालू बेहद आक्रामक हो गई और उसने लोगों पर हमला कर दिया।

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ग्रामीणों में भारी नाराजगी

घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ रही है, लेकिन वन विभाग प्रभावी कदम नहीं उठा रहा। लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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