PU Special :समय की परीक्षा में सिस्टम फेल-भोपाल के 3 दफ्तरों की 3 दिन पड़ताल; कलेक्ट्रेट, नगर निगम और हमीदिया अस्पताल में समय पर नहीं पहुंच रहे अफसर-डॉक्टर

पीपुल्स टीम, भोपाल। सरकारी दफ्तरों में आम लोगों के काम समय पर हों, इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के पहुंचने का समय तय है, लेकिन भोपाल में तीन अलग-अलग सरकारी संस्थानों की जमीनी पड़ताल में तस्वीर इससे अलग दिखाई दी। पीपुल्स समाचार के तीन रिपोर्टरों ने तीन दिन (18, 21 और 22 सितंबर) तक हमीदिया अस्पताल, नगर निगम के जोन कार्यालय और कलेक्ट्रेट में तय समय के दौरान व्यवस्थाओं को देखा। हमीदिया की ओपीडी में सुबह 9 बजे मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते मिले, जबकि केबिन में जूनियर डॉक्टर मरीज देख रहे थे। नगर निगम के जोन कार्यालयों में भी शिकायतें लेकर पहुंचे लोगों को जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी का इंतजार करना पड़ा। कलेक्ट्रेट में सुबह 10 बजे तक अधिकारी-कर्मचारियों की कुर्सियां खाली मिलीं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अपनी परेशानियों को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ितों को भी एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। यानि समय की ‘परीक्षा’ में सरकारी सिस्टम फेल हो गया। इस पर संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी वजहें बताईं और समय पर उपस्थिति नहीं होने पर कार्रवाई की बात भी कही।
यह मिले हालात
भोपाल कलेक्ट्रेट
दिनांक : 18, 21 और 22 सितंबर 2026
समय : सुबह 10.00 बजे

कलेक्ट्रेट में सुबह 10 बजे तक कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा,एडीएम सुमित कुमार पांडेय,एडीएम प्रकाश नायक,महेंद्र सिंह कवचे सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी नजर नहीं आए। 10:19 बजे एडीएम प्रकाश नायक पहुंचे। पता चला कि कलेक्टर मिश्रा व एडीएम पांडेय अलग-अलग वीसी से होने वाली बैठकों के कारण नहीं आए। वहीं 11 बजे के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों का आना शुरू हुआ, जो 11:30 बजे तक चलता रहा। शुक्रवार को भी सुबह 10 बजे भी कोई अधिकारी व कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में सफाई होती हुई मिली,जबकि 10 बजे सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को आ जाना चाहिए। कुछ कर्मचारियों ने देरी से आने की वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर-12 में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत जनकल्याण शिविर लगा है,वहां कलेक्टर,एडीएम सहित लगभग अधिकांश अधिकारी व कर्मचारी गए हुए हैं।
परेशान रहे लोगों ने कहा…

विदिशा रोड भानपुर चौराहे के पास टीन शेड लगाकर व पिलर डालकर पक्का अतिक्रमण किया गया है। शिकायत के बाद नायब तहसीलदार गोविंदपुरा नजूल का अतिक्रमण बेदखली का आदेश है, लेकिन कई चक्कर लगाने के बाद कार्रवाई नहीं हो रही है।
-अशोक प्रजापति, भोपाल

मेरे घर का बिजली का बिल 30 हजार रुपये आ गया है। पति का कैंसर की वजह से देहांत हो गया। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं। बुजुर्ग सुमन बिजली बिल माफ कराने बिजली कंपनी के कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक भटक रही हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा।
-सगुन बाई, बगरोदा पठार
मैं सुबह से बैठा हूं लेकिन अब तब कोई अधिकारी नहीं आया है। मोहल्ले में गंदे पानी भरने की समस्या है, जिसके निवारण के लिए 10 से 12 बार चक्कर लगा चुका हूं।
-आत्माराम सोनी, भोपाल
निवेश प्रोत्साहन केंद्र पर नहीं थे अधिकारी-कर्मचारी

कलेक्ट्रेट के निवेश प्रोत्साहन केंद्र पर तीनों दिन कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, तीनों एसडीएम सुमित कुमार पांडेय, कहेंद्र कवचे और प्रकाश नायक मौजूद नहीं थे। कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की कुर्सी खाली मिली। उनके पहुंचने का सिलसिला 10.30 बजे से 11 बजे तक चलता रहा।
भोपाल नगर निगम का जोन 17
दिनांक : 18, 21 और 22 सितंबर 2026
समय : सुबह 9.30 बजे
नगर निगम के जोन-17 कार्यालय में सुबह 9 बजे लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। किसी को सड़क की शिकायत थी तो कोई नाली, स्ट्रीट लाइट, निर्माण या भवन की अनुमति से जुड़ा काम लेकर पहुंचा था। जोन कार्यालय में जोनल अधिकारी के साथ सिविल, विद्युत, भवन अनुज्ञा और दूसरे विभागों के कर्मचारी बैठते हैं, लेकिन 9 बजे तक कोई ऑफिस में मौजूद नहीं था। अगले दिन भी जोन-3 कार्यालय में लोगों की आवाजाही रही। सिविल शाखा में सड़क, नाली और निर्माण कार्य से जुड़ी शिकायतें लेकर लोग पहुंचे थे। लेकिन, यहां जोनल अधिकारी मौजूद नहीं और न ही कोई कर्मचारी। कुर्सियां खाली थीं। हालांकि एक-दो कर्मचारी कार्यालय के बाहर जरूर मौजूद थे।
परेशान व्यक्ति ने कहा…
मैं अपना काम कराने के लिए सुबह जोन-17 कार्यालय आया था लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं थे। आखिर में बिना काम कराए वापस जाना पड़ा। दोबारा आना पड़ेगा, जिससे समय भी खराब होगा और काम भी अटक गया।
-श्याम सिंह तोमर, आवास विकास कॉलोनी
शिकायत मिली तो जांच कराएंगे
नगर निगम के सभी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालय पहुंचने का समय तय है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के समय पर कार्यालय में मौजूद नहीं रहने की शिकायत मिलती है तो उपस्थिति की जांच कराई जाएगी।
-संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम
हमीदिया अस्पताल भोपाल
दिनांक : 18, 21 और 22 सितंबर 2026
समय : सुबह 9.00 बजे
ईएनटी ओपीडी में डॉक्टर के कैबिन के बाहर मरीजों की लंबी कतार थी। अंदर डॉक्टर नहीं थे, लेकिन तीन जूनियर डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहे थे। ओपीडी में जब डॉक्टर की जानकारी ली तो पता चला कि डॉ. यशवीर भर्ती मरीजों काे देखने गए थे। करीब 10 बजे तक वे भी ओपीडी में लौट आए। हमने उस दिन के अटेंडेंस शीट से मिलान किया तो उनका थंब इंप्रेशन सुबह 9.15 पर था। इसी तरह 18 सितंबर काे भी मेडिसिन विभाग में ओपीडी के बाहर मरीजों की कतार थी। पुराने ट्रॉमा ब्लॉक में यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ थी। यहां डॉ. समीर व्यास की ओपीडी के बाहर भी व्हील चेयर पर मरीज डॉक्टर का इंतजार कर रहा था। केबिन में डॉक्टर तो नहीं थे लेकिन दो जूनियर डॉक्टर मरीजों मरीजों की जांच कर रहे थे। केबिन के बाद बैठे गार्ड ने बताया कि डॉक्टर साहब इमरजेंसी में किसी मरीज को देखने गए हैं। करीब आधे घंटे बाद डॉ. व्यास ओपीडी में आ गए। इसी ब्लॉक पर मेडिसिन, स्किन और एचआईवी क्लीनिक है, जहां डॉक्टर मौजूद थे।
ये भी पढ़ें: सड़क के बीच पुल पर बैठा तेंदुआ, देर रात कैमरे में कैद हुआ खौफनाक नजारा… VIDEO वायरल
देर से आने पर 30 डॉक्टरों पर कार्रवाई
मालूम हो कि हमीहदया अस्पताल में डॉक्टरों का ओपीडी समय सुबह 9 बजे से तय किया गया है। देर से आने वाले चिकित्सकों पर प्रबंधन भी सख्ती कर रहा है। दो दिनों में देर से आने पर 29 चिकित्सकों की एक दिन का अवकाश लगाया गया।
पीड़ित ने कहा…
मुझे तेज पेट दर्द हो रहा था तो सुबह करीब 9 बजे हमीदिया अस्पताल पहुंच गया था। यहां गार्ड ने बताया कि बड़े डॉक्टर नहीं है, जूनियर डॉक्टर बैठे हैं। उन्होंने ही जांच कर दवा देदी।
-मो. अनवर, काजी कैम्प
समय तय है, कार्रवाई की जाएगी
ओपीडी के सभी डॉक्टरों के लिए समय तय है, अगर कोई समय से नहीं आएगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. कविता एन सिंह, डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज
ये भी पढ़ें: इंदौर में नो कार डे: आठ चौराहों पर 30% कम हुई कारों की आवाजाही, अफसरों ने चुनी ईवी




















