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झीरम मामले पर राहुल गांधी का बड़ा सवाल,हमले से पहले कितनी थी सुरक्षा,मांगी पूरी रिपोर्ट

13 साल पुराने झीरम केस में अब सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कथित साजिश तक की जानकारी जुटाने पर जोर,झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद कांग्रेस ने आगे की कानूनी रणनीति तेज कर दी है। शनिवार को नई दिल्ली में राहुल गांधी से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और झीरम प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की।
झीरम मामले पर राहुल गांधी का बड़ा सवाल,हमले से पहले कितनी थी सुरक्षा,मांगी पूरी रिपोर्ट

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब कांग्रेस ने मामले की आगे की कानूनी लड़ाई पर फोकस बढ़ा दिया है। शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और झीरम प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की। बैठक में हमले से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी जुटाने और आगे की कानूनी कार्रवाई पर चर्चा हुई।

10 जनपथ में करीब 45 मिनट चली अहम बैठक

नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झीरम हमले से प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। करीब 45 मिनट चली इस बैठक में झीरम घाटी मामले के मौजूदा कानूनी हालात, आगे की रणनीति और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत अन्य नेता मौजूद रहे।

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राहुल गांधी ने मांगी हमले से पहले की सुरक्षा रिपोर्ट

बैठक का एक प्रमुख मुद्दा 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था रहा। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर दी गई सुरक्षा का पूरा विवरण जुटाने को कहा है। अब यह जानकारी सामने लाने की तैयारी है कि परिवर्तन यात्रा के दौरान कहां, कब और कितनी सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी, खासकर झीरम हमले से पहले के तीन चरणों में सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी।

सुरक्षा व्यवस्था के रिकॉर्ड पर क्यों बढ़ा फोकस?

झीरम हमले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा रहे हैं। अब कांग्रेस नेताओं की राहुल गांधी से हुई बैठक के बाद इस पहलू से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने की बात सामने आई है।बैठक में यह भी चर्चा हुई कि उपलब्ध तथ्यों और कानूनी सलाह के आधार पर आगे किन कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

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सीनियर वकीलों से ली जाएगी कानूनी राय

झीरम मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस वरिष्ठ कानून विशेषज्ञों से राय लेने की तैयारी में है। चर्चा के दौरान कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा जैसे वरिष्ठ वकीलों से कानूनी सलाह लेने की संभावना का उल्लेख किया गया। हालांकि, इन नामों को लेकर अभी किसी अंतिम नियुक्ति या औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं हुई है। आगे की रणनीति कानूनी राय और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय किए जाने की बात कही गई है।

टीएस सिंहदेव ने राहुल गांधी के सामने रखे ये सवाल

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने झीरम मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य बैठक में रखे। सिंहदेव के अनुसार, अदालत से दोषी ठहराए गए 10 लोगों की भूमिका और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह दावा किया कि मामले में जिन लोगों को कथित साजिश से जोड़ा जाता रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल अब भी मौजूद हैं। उन्होंने NIA जांच के कथित साजिश वाले पहलू को लेकर भी अपनी आपत्तियां सामने रखीं।

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‘साजिश के पहलू की जांच पर भी सवाल’

सिंहदेव ने कहा कि NIA की जांच में साजिश के पहलू को लेकर आगे की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। उन्होंने रिपोर्ट के पैराग्राफ 307 का भी उल्लेख किया, जिसमें नंदकुमार पटेल और उनके बेटों की पहचान से संबंधित पूछताछ का जिक्र होने की बात कही। सिंहदेव के मुताबिक इस बिंदु के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ी, इसे लेकर कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने की जरूरत है।

पुलिस कस्टडी जैसे विकल्पों पर भी चर्चा

बैठक में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विभिन्न विकल्पों पर चर्चा हुई। सिंहदेव के मुताबिक जरूरत पड़ने पर पुलिस कस्टडी जैसी कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, यह फिलहाल चर्चा और कानूनी विकल्प के स्तर पर है। किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का अंतिम निर्णय संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

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हाईकोर्ट पहुंच चुका है झीरम केस

झीरम मामले में 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। मामले की सुनवाई करीब 13 साल चली और अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।  अब मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच चुका है। इसे डेथ रेफरेंस के रूप में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने रखा गया है। हाईकोर्ट अब ट्रायल कोर्ट के फैसले और रिकॉर्ड की न्यायिक समीक्षा करेगा। 

हाईकोर्ट में क्या होगा आगे?

मौत की सजा के मामलों में ट्रायल कोर्ट के मृत्युदंड की पुष्टि हाईकोर्ट द्वारा की जानी होती है। झीरम मामले में भी इसी प्रक्रिया के तहत डेथ रेफरेंस हाईकोर्ट भेजा गया है। अब हाईकोर्ट के सामने ट्रायल कोर्ट के फैसले, साक्ष्यों और दोषसिद्धि से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा का चरण है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक फिलहाल हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। 

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क्या था झीरम घाटी हमला?

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे।  करीब 13 साल बाद सितंबर 2026 में इस मामले में NIA की विशेष अदालत ने पहले दोषसिद्धि और फिर 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया हाईकोर्ट के स्तर पर आगे बढ़ रही है।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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