PU Special: CM के गृह जिले में विकास की खुली पोल, खेत-नाले का गंदा पानी पी रहे सरकारी स्कूल के मासूम

करमघाट स्कूल का हैंडपंप कई दिनों से खराब, शिकायतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम,प्यास बुझाने दूषित पानी पर निर्भर बच्चे, शा. प्रा. शाला करमघाट में पेयजल संकट ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल का हैंडपंप कई दिनों से खराब है। पानी की दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे पास के खेतों और नाले से बहकर आने वाले पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
CM के गृह जिले में विकास की खुली पोल, खेत-नाले का गंदा पानी पी रहे सरकारी स्कूल के मासूम

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर सरकार के विकास के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं। ग्राम पंचायत सुलेसा के शासकीय प्राथमिक शाला करमघाट में हैंडपंप पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है। पानी की दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण मासूम छात्र-छात्राएं पास के खेतों और नाले से बहकर आ रहे दूषित पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर बताए जा रहे हैं।

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सरकारी स्कूल में पानी तक नहीं

करमघाट प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले बच्चों के सामने सबसे बुनियादी जरूरत पीने के साफ पानी का संकट खड़ा हो गया है। स्कूल परिसर के पास लगा हैंडपंप खराब होने के कारण बच्चों को प्यास बुझाने के लिए खेतों से बहकर आने वाले पानी का सहारा लेना पड़ रहा है।

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विकास के दावों के बीच ये कैसी तस्वीर

साय सरकार ने  प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे लगातार किए जाते हैं। लेकिन जशपुर के इस स्कूल की तस्वीरें उन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। सवाल यह है कि जब स्कूल में बच्चों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है, तो बाकी शैक्षणिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति क्या होगी?

शिकायतों के बाद भी सिस्टम बेपरवाह

स्थानीय स्तर पर हैंडपंप खराब होने की शिकायत संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद कई दिनों तक समस्या का समाधान नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।बच्चों की प्यास और जिम्मेदारों की चुप्पी—आखिर जवाबदेह कौन?

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दूषित पानी से बच्चों की सेहत पर खतरा

खेतों और नाले से बहकर आने वाले पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। पानी दूषित होने की स्थिति में संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में स्कूल में तत्काल स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी है।

BEO बोले,जल्द सुधरेगा बोरिंग

मामले पर बगीचा BEO सुदर्शन पटेल का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। संबंधित तकनीकी टीम को हैंडपंप/बोरिंग को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

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अब सवाल,कब तक दूर होगी समस्या?

अधिकारी की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों को कितने दिनों तक इस परेशानी का सामना करना पड़ेगा? स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को साफ पानी उपलब्ध कराना किसी अतिरिक्त सुविधा का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरत है। मुख्यमंत्री के गृह जिले से सामने आई यह तस्वीर सरकार और प्रशासन के लिए बड़ा सवाल है—क्या स्कूल के मासूमों को साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए भी किसी खबर और वीडियो का इंतजार करना पड़ेगा?

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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