सेंधवा में कारोबारी अशोक तायल के ठिकानों पर ED की दबिश, करोड़ों के लोन मामले से जुड़ने की चर्चा

सेंधवा। बड़वानी जिले के सेंधवा में बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कारोबारी अशोक तायल और उनके परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की। ईडी की अलग-अलग टीमों ने जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित आवास, पुराने एबी रोड स्थित मकान और वरला रोड स्थित राजराजेश्वर जिनिंग फैक्ट्री में पहुंचकर जांच की। कार्रवाई सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई और दोपहर तक अलग-अलग परिसरों में जांच जारी रही। सेंधवा पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने ईडी की कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ईडी की टीम किस मामले में जांच कर रही है और किन दस्तावेजों या लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
करोड़ों के लोन से जुड़े मामले की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक ईडी की यह कार्रवाई राजराजेश्वर वेंचर्स से जुड़े करोड़ों रुपये के लोन मामले से संबंधित हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बुधवार सुबह ईडी की टीमों ने तायल बंधुओं से जुड़े अलग-अलग परिसरों में पहुंचकर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू की। दोपहर करीब 2 बजे एक टीम वरला रोड स्थित राजराजेश्वर वेंचर्स के परिसर से बाहर निकली। बंद कमरों में जांच की कार्रवाई काफी देर तक चलती रही।
सेंधवा के बड़े कारोबारी हैं तायल बंधु
अशोक तायल और उनके परिवार का सेंधवा में कपास कारोबार और जिनिंग उद्योग से जुड़ा बड़ा व्यवसाय है। तायल बंधु बड़वानी जिले के अलावा महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी कारोबार करते हैं। सेंधवा शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित निमाड़ एग्रो पार्क का संचालन भी तायल बंधुओं से जुड़ा बताया जाता है। ईडी की मौजूदा कार्रवाई के बीच करीब आठ महीने पहले हुई सीबीआई की कार्रवाई भी चर्चा में आ गई है।
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आठ महीने पहले CBI ने की थी कार्रवाई
इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित 13 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी मामले में तायल बंधुओं से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी। सीबीआई की टीम ने पुलिस बल के साथ जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित अशोक तायल के निवास सहित अन्य परिसरों पर दबिश दी थी। सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में अर्पित राजेंद्र कुमार तायल, निकुंज गिरधारीलाल तायल, अशोक बिहारीलाल तायल और अंकित गिरधारीलाल तायल समेत कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और दस्तावेजों में जालसाजी जैसे आरोपों की जांच की जा रही थी।
13 करोड़ के लोन को लेकर था आरोप
सीबीआई की जांच के मुताबिक, वर्ष 2019 में नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत सेंधवा के पास जामली गांव में कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के लिए करीब 13 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। इसके अलावा केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ओर से करीब 10 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया था। CBI के आरोपों के मुताबिक, ऋण की रकम का इस्तेमाल निर्धारित परियोजना पर करने के बजाय फर्जी समझौतों के माध्यम से अन्य कंपनियों और बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि परियोजना की समय-सीमा बढ़वाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया गया।
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लोन खाता NPA होने के बाद शुरू हुई जांच
जांच के अनुसार सितंबर 2024 में संबंधित लोन खाता NPA घोषित हुआ था। इसके बाद ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच के लिए सीबीआई को पत्र भेजा गया। सीबीआई ने बाद में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।




















