MP में इंटर्न डॉक्टर्स का आंदोलन खत्म, 21,500 रुपए हुआ स्टाइपेंड, लाठीचार्ज से लेकर 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

तीन दिन तक चले आंदोलन के बाद अब सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच गतिरोध खत्म हो गया है। 21,500 रुपए मासिक स्टाइपेंड पर बनी सहमति को इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
MP में इंटर्न डॉक्टर्स का आंदोलन खत्म, 21,500 रुपए हुआ स्टाइपेंड, लाठीचार्ज से लेकर 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच
तीन दिन से चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आज खत्म

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले तीन दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। इंटर्न डॉक्टरों और सरकार के बीच बातचीत के बाद सहमति बन गई है। मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद इंटर्न डॉक्टरों के लिए 21,500 मासिक स्टाइपेंड तय करने पर सहमति बनी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद सरकार की ओर से यह फैसला लिया गया।

तीन दिन से चल रहा था आंदोलन

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर MBBS इंटर्न डॉक्टर पिछले तीन दिनों से आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे थे। डॉक्टरों की मांग थी कि उन्हें मिलने वाले स्टाइपेंड को बढ़ाया जाए, क्योंकि मौजूदा राशि उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं पर भी पड़ा। कई जगह मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बढ़ते दबाव के बीच सरकार और डॉक्टर प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का रास्ता निकाला गया।

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स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म

मंत्रालय में हुई डेढ़ घंटे की अहम बैठक

मामले को सुलझाने के लिए इंटर्न डॉक्टरों, JUDA और MTA के प्रतिनिधियों को मंत्रालय बुलाया गया। यहां उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ करीब डेढ़ घंटे तक बैठक हुई। बैठक में इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी। प्रतिनिधियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की जरूरत और आंदोलन के कारणों के बारे में सरकार को जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच चर्चा के बाद स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बनी। बैठक खत्म होने के बाद आंदोलन खत्म करने का रास्ता साफ हो गया।

पहले 18,500 का प्रस्ताव था

जानकारी के मुताबिक, सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों के लिए 18,500 मासिक स्टाइपेंड का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन इंटर्न डॉक्टर इस राशि से संतुष्ट नहीं थे। डॉक्टर प्रतिनिधियों का कहना था कि उनकी मांग इससे अधिक स्टाइपेंड की थी। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन जारी रखा। सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो प्रस्तावित राशि में बदलाव किया गया। आखिरकार स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 प्रति माह करने पर सहमति बनी। इसके बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया।

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डॉक्टरों के लिए 21,500 मासिक स्टाइपेंड तय करने पर सहमति बनी

 

CM मोहन यादव से चर्चा के बाद निकला समाधान

स्टाइपेंड विवाद को खत्म करने के लिए सरकार के स्तर पर लगातार बातचीत चल रही थी। मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर अंतिम सहमति बनी। अब सरकार की ओर से इस फैसले की औपचारिक जानकारी दी जा सकती है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। इसमें स्टाइपेंड बढ़ाने के फैसले और आंदोलन खत्म होने की जानकारी दी जा सकती है।

लाठीचार्ज और वाटर कैनन मामले में भी कार्रवाई

इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई भी विवादों में रही थी। प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। साथ ही घटना की जांच के लिए एक टीम भी गठित की गई है। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और क्या प्रक्रिया का पालन किया गया।

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घायल छात्रों के इलाज के निर्देश

प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को लेकर भी सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को घायल छात्रों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इससे आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

ओपीडी सेवाओं पर पड़ा था असर

इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों के कामकाज पर देखने को मिला। प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं। मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी न हो, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव था। यही वजह रही कि सरकार ने डॉक्टर प्रतिनिधियों से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की कोशिश की।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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