PU Special: विसर्जन के बाद मिट्टी से उगेंगे पौधे, रायपुर जेल में बंदियों ने बनाई 500 बीजयुक्त गणेश प्रतिमाएं

प्रेम कुमार रायपुर: गणेशोत्सव में इस बार रायपुर केंद्रीय जेल के बंदियों ने आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश की है, जो लोगों का ध्यान खींच रही है। केंद्रीय जेल रायपुर में करीब 10 बंदियों ने प्राकृतिक मिट्टी और रंगों से भगवान गणेश की 500 पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं तैयार की हैं। इन प्रतिमाओं की सबसे खास बात यह है कि इनमें तुलसी समेत विभिन्न पौधों के बीज शामिल किए गए हैं। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद मिट्टी और पानी के संपर्क में आने पर इन बीजों से पौधों के अंकुरित होने की उम्मीद है।

500 गणेश प्रतिमाएं, लेकिन खास है इनका ‘ग्रीन’ संदेश
केंद्रीय जेल रायपुर में आगामी गणेशोत्सव के लिए तैयार की गई इन प्रतिमाओं का आकार करीब 1 से 2 फीट रखा गया है। प्रतिमाओं के निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मूर्तियों में विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है, ताकि गणेश प्रतिमा का विसर्जन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित न रहे, बल्कि उसके बाद हरियाली का संदेश भी आगे बढ़े।

यह भी पढ़ें: IGKV में पेपर लीक के बाद फिर शुरू हुई परीक्षा, 3 विषयों के एग्जाम दोबारा, नई व्यवस्था पर बड़ा सवाल
विसर्जन के बाद ‘गणपति’ देंगे हरियाली का उपहार
इन बीजयुक्त गणेश प्रतिमाओं को विसर्जित किए जाने के बाद मिट्टी में मौजूद बीजों के अंकुरित होने की परिकल्पना की गई है। इसके जरिए लोगों को प्लास्टर ऑफ पेरिस और कृत्रिम रंगों के बजाय पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जा रहा है।यानी इस पहल में गणेश प्रतिमा का जीवन विसर्जन के साथ खत्म नहीं होगा, बल्कि उसमें मौजूद बीज आगे चलकर पौधे के रूप में नई शुरुआत कर सकते हैं।

10 बंदियों की मेहनत से तैयार हुईं ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएं
केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों को विभिन्न कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में करीब 10 बंदियों ने भगवान श्री गणेश की इन प्रतिमाओं को तैयार किया है। मिट्टी को आकार देने से लेकर प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने तक बंदियों ने मेहनत और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें अपनी प्रतिभा और हुनर को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने का अवसर भी दिया।
हुनर को मिला सकारात्मक रास्ता
जेल प्रशासन के मुताबिक इस तरह की गतिविधियां बंदियों के कौशल विकास और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। रचनात्मक कार्यों से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें समाजोपयोगी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बीजयुक्त गणेश प्रतिमाओं की पहल इसी सोच का हिस्सा है, जिसमें कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ा गया है।

जेल अधीक्षक बोले- आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ
जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बंदियों द्वारा तैयार की गई बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं यह संदेश देती हैं कि आस्था


और प्रकृति संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
उनके मुताबिक ऐसी रचनात्मक गतिविधियां बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर देती हैं। साथ ही इससे समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ के 3 अफसर बन सकते हैं IAS, दिल्ली में DPC की बैठक,अभिषेक, सचिन और राजीव पांडे के नाम पर नजर
इस गणेशोत्सव में ‘ग्रीन गणपति’ क्यों है खास?
प्राकृतिक मिट्टी से तैयार की गईं प्रतिमाएं
प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल
करीब 500 गणेश प्रतिमाएं तैयार
प्रतिमाओं का आकार करीब 1 से 2 फीट
तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज शामिल
विसर्जन के बाद बीजों के अंकुरित होने की परिकल्पना
करीब 10 बंदियों ने मिलकर किया निर्माण
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश




















