इंदौर में शोर के खिलाफ हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! पुलिस थानों में साउंड मीटर, साइलेंस जोन की सूची अखबारों में छापने के निर्देश

इंदौर। शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। तेज आवाज में डीजे बजाने, अनावश्यक हॉर्न और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले शोर पर नियंत्रण के लिए कोर्ट ने पुलिस, नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अब शहर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि प्रदूषण मापने वाले उपकरण उपलब्ध कराने, साइलेंस जोन की सूची अखबारों में प्रकाशित करने और नगर निगम की कचरा गाड़ियों से होने वाले शोर को कम करने की व्यवस्था करनी होगी।न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक 25397/2023 में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी।
ये भी पढ़ें: इंदौर के फ्लैट में मिला बिजली कर्मचारी का शव, शरीर पर चोट के निशान! महिला मित्र से पूछताछ, मौत की गुत्थी उलझी
हर थाने में होगा साउंड मीटर, पुलिस मौके पर माप सकेगी शोर
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इंदौर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि प्रदूषण मापने वाले उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। इन उपकरणों का इस्तेमाल उन पुलिसकर्मियों द्वारा किया जाएगा, जो शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हैं।सुनवाई के दौरान खजराना के एसीपी आशीष पटेल ने ध्वनि प्रदूषण मापने वाला उपकरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था। हालांकि, सुनवाई में यह बात सामने आई कि उपकरण होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर शोर मापने और उसके आधार पर कार्रवाई करने की प्रभावी व्यवस्था नहीं बन सकी है।इस पर कोर्ट ने प्रत्येक थाने के स्तर पर उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे तेज आवाज की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर शोर का स्तर माप सकेगी और निर्धारित मानकों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई कर सकेगी।
ये भी पढ़ें: इंदौर में पहचान छिपाकर महिला को प्रेमजाल में फंसाने का आरोप! शादी का झांसा, 4 साल के मासूम से गलत हरकत की शिकायत
पुलिस के नंबर अखबार और वेबसाइट पर होंगे प्रकाशित
ध्वनि प्रदूषण से परेशान लोगों को शिकायत करने में परेशानी न हो, इसके लिए हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। प्रत्येक पुलिस थाने का संपर्क नंबर समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि स्रोतों से परेशान नागरिक सीधे संबंधित पुलिसकर्मियों से संपर्क कर सकें। शिकायत मिलने पर पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।कोर्ट ने पुलिस थानों में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करने को कहा है। इसके अलावा, पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज की गई शिकायतों का विवरण भी अदालत के सामने रखना होगा।
ये भी पढ़ें: इंदौर में इवेंट मशीन की चिंगारी ने मचाया कहर! दादा के हाथ झुलसे, पोते के चेहरे और गले पर चोट
हर वार्ड में दो स्वयंसेवक करेंगे निगरानी, वीडियो से देंगे सूचना
ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट ने वार्ड स्तर पर स्वयंसेवकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।आदेश के अनुसार, प्रत्येक थाना प्रभारी अपने क्षेत्र के हर वार्ड से दो स्वयंसेवकों को नियुक्त करेगा। ये स्वयंसेवक अपने इलाके में ध्वनि प्रदूषण करने वाले व्यक्तियों या वाहनों की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर वे अपने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकेंगे।इस व्यवस्था से उन लोगों को मदद मिलने की उम्मीद है, जो सीधे पुलिस के पास जाकर शिकायत करने में हिचकिचाते हैं। स्वयंसेवकों से मिलने वाली सूचना के आधार पर पुलिस संबंधित मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी।हालांकि, स्वयंसेवकों की भूमिका सूचना देने और घटना का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तक रहेगी। कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी।
ये भी पढ़ें: इंदौर में कांग्रेस पार्षद पर FIR! निगम की कार्रवाई रोकने पहुंचे, ट्रक के पहियों की हवा निकालने का आरोप
साइलेंस जोन की सूची अखबारों में छापनी होगी
हाईकोर्ट ने साइलेंस जोन की सूची के प्रकाशन को लेकर भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद सूची को विधिवत प्रकाशित करने की व्यवस्था का उचित पालन नहीं हुआ।सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अंश प्रस्तुत किए गए थे। कोर्ट ने इन्हें पर्याप्त नहीं माना और संबंधित अधिकारियों को साइलेंस जोन की सूची विधिवत प्रकाशित करने के निर्देश दिए।इसके साथ ही शहर के ऐसे अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के संबंध में आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित करने को कहा गया है, जिन्हें अभी तक साइलेंस जोन की सूची में शामिल नहीं किया जा सका है।इसका उद्देश्य नागरिकों को यह जानकारी उपलब्ध कराना है कि किन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है और कहां निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: लॉरेंस गैंग पर इंदौर क्राइम ब्रांच का शिकंजा! हैरी बाक्सर को पकड़ने के लिए जारी होगा लुकआउट सर्कुलर
नवरात्रि और दशहरे में तेज शोर पर कोर्ट की चिंता
हाईकोर्ट ने नवरात्रि और दशहरे के दौरान शहर में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति पर भी चिंता जताई। आदेश में कहा गया कि पिछले त्योहारी सीजन में शोर की स्थिति ऐसी रही कि पुलिस ध्वनि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करने में असहाय दिखाई दी।त्योहारों के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि स्रोतों से होने वाले शोर को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि शिकायतों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए और कार्रवाई की जानकारी भी प्रस्तुत की जाए।अदालत के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन हो और नागरिकों को अनावश्यक शोर से राहत मिल सके।
नगर निगम की कचरा गाड़ियों की तेज आवाज भी होगी कम
हाईकोर्ट ने नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों पर लगे लाउडस्पीकरों से बजने वाले स्वच्छता गीतों की तेज आवाज पर भी आपत्ति जताई।कोर्ट ने माना कि कचरा गाड़ियों के आने की सूचना नागरिकों तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि इन वाहनों से निकलने वाली आवाज को कानूनी रूप से अनुमेय डेसिबल सीमा के भीतर लाया जाए।आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित सीमा तक आवाज कम करना संभव नहीं हो, तो मौजूदा आवाज की तुलना में उसे 25 प्रतिशत तक सीमित किया जाए। इसका अर्थ है कि मौजूदा स्तर से आवाज में कम से कम 75 प्रतिशत की कमी सुनिश्चित करनी होगी।इस निर्देश के लागू होने से कचरा संग्रहण वाहनों के लाउडस्पीकरों से होने वाले शोर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
तीन सप्ताह में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों और पक्षों को आदेश के पालन की रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति इंदौर नगर निगम की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ऋषि तिवारी को भी अनुपालन के लिए उपलब्ध कराने को कहा गया है।मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। इस दौरान आदेश के पालन और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
नागरिकों को शोर से राहत दिलाना मुख्य उद्देश्य
हाईकोर्ट के निर्देशों से इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश की गई है। पुलिस थानों में साउंड मीटर की उपलब्धता, संपर्क नंबरों का प्रकाशन, वार्ड स्तर पर स्वयंसेवकों की नियुक्ति और नगर निगम की कचरा गाड़ियों की आवाज कम करने जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।




















