इंदौर में ट्रैफिक के बीच लंबा सफर पड़ रहा भारी, 350 मरीजों में 40% को एलर्जी-अस्थमा के लक्षण

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। शहर में रोजाना लंबा सफर और ट्रैफिक के बीच समय बिताना लोगों की सेहत पर असर डाल सकता है। खासकर कोचिंग जाने वाले किशोरों और दोपहिया वाहन से सफर करने वालों में नाक, साइनस और सांस से जुड़ी एलर्जी की शिकायतें सामने आ रही हैं। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रवि डोसी ने पिछले 14 महीनों में 18 से 60 वर्ष के करीब 350 शहरी मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। उनके अनुसार इनमें लगभग 40 प्रतिशत यानी 120 से 150 मरीजों में एलर्जी और अस्थमा से जुड़े लक्षण मिले। यह उनके अपने मरीजों के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण है, जिसे वे प्रकाशन के लिए संकलित कर रहे हैं।
लंबे सफर करने वालों में ज्यादा दिखीं शिकायतें
डॉ. डोसी के अनुसार विश्लेषण में ऐसे कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जो रोजाना शहर में लंबी दूरी तय करते हैं। शाम के समय रेडिसन से पलासिया तक पहुंचने में करीब 40 मिनट लग सकते हैं जबकि कुछ मार्गों पर सफर डेढ़ घंटे तक खिंच जाता है। उनके क्लीनिकल अनुभव के अनुसार रोजाना लंबे समय तक सफर करने वाले लोगों में सांस और एलर्जी संबंधी समस्याएं अधिक देखने को मिलीं। विश्लेषण में सार्वजनिक परिवहन, दोपहिया और चारपहिया वाहनों से सफर करने वालों की स्थिति भी देखी गई। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वालों में शिकायतें अपेक्षाकृत कम थीं, जबकि दोपहिया चालकों और कार से लंबा सफर करने वालों में भी परेशानी सामने आई। हालांकि यह विश्लेषण डॉक्टर के अपने मरीजों तक सीमित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ट्रैफिक या किसी खास वाहन के कारण ही सभी मरीजों में एलर्जी और अस्थमा के लक्षण विकसित हुए।
कार का एसी, परफ्यूम और रखरखाव भी हो सकते हैं कारण
डॉ. डोसी के मुताबिक लंबे समय तक कार में रहने वाले लोगों को भी एलर्जी की शिकायत हो सकती है। वाहन के एसी की सफाई, परफ्यूम और कार का ठीक से रखरखाव नहीं होना संभावित कारणों में शामिल हैं। कुछ मरीजों ने पूरे सप्ताह परेशानी रहने, जबकि रविवार को सफर कम होने पर राहत महसूस होने की बात बताई। विशेषज्ञ के अनुसार, रोजाना के सफर और वातावरण के संपर्क में आने के पैटर्न को समझना लक्षणों के संभावित कारणों की पहचान में मदद कर सकता है।
किशोरों और युवाओं में इलाज का असर दिखने में लग सकता है समय
डॉ. डोसी के क्लीनिकल अनुभव के अनुसार मध्यम आयु वर्ग के कुछ मरीजों में करीब तीन महीने में अच्छा सुधार दिखता है, जबकि किशोरों और युवाओं में छह महीने तक लग सकते हैं। तनाव, पर्याप्त आराम नहीं मिलना और कुछ दवाओं से नींद आने जैसी समस्याएं इलाज को नियमित बनाए रखना मुश्किल कर सकती हैं। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखना और दवाओं में बदलाव खुद से न करना जरूरी है।
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दो से तीन सप्ताह तक खांसी रहे तो डॉक्टर से लें सलाह
डॉ. डोसी ने सलाह दी कि यदि खांसी दो से तीन सप्ताह तक बनी रहे, बलगम आए या कामकाजी दिनों और छुट्टी के दिन लक्षणों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।




















