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फ्रांस में छात्रों के विरोध के बाद सरकार झुकी, Parcoursup प्लेटफॉर्म 2028 तक होगा खत्म, महंगाई और शिक्षा सुधार के वादे

फ्रांस सरकार का बड़ा ऐलान 2027 में Parcoursup में बड़े बदलाव, 2028 में नया सिस्टम, क्लास साइज कम, शिक्षक भर्ती, ग्रांट बढ़ोतरी का वादा, 17 अक्टूबर हिंसा के बाद 2400 गिरफ्तार, 31 अक्टूबर और 5 नवंबर को फिर बड़े प्रदर्शन।
फ्रांस में छात्रों के विरोध के बाद सरकार झुकी, Parcoursup प्लेटफॉर्म 2028 तक होगा खत्म, महंगाई और शिक्षा सुधार के वादे
फ्रांस में प्रोटेस्ट का फाइल फोटो

पेरिस। फ्रांस सरकार ने कहा है कि वह 2028 तक अपने नेशनल यूनिवर्सिटी एडमिशन प्लेटफॉर्म को बदल देगी और कई एजुकेशनल रिफॉर्म्स लागू करेगी। यह स्टेप यूनिवर्सिटी में एडमिशन, स्कूलों की फंडिंग और बढ़ती लिविंग-कॉस्ट यानी महंगाई को लेकर हफ्तों से चल रहे प्रोटेस्ट्स के बीच स्टूडेंट्स की शिकायतों को दूर करने के लिए उठाया गया है। हायर एजुकेशन मिनिस्टर फिलिप बैप्टिस्ट ने अनाउंस किया कि मौजूदा प्लेटफॉर्म, 'पारकोर्सअप' (Parcoursup) में 2027 के एडमिशन सेशन के लिए बड़े बदलाव किए जाएंगे, अगले साल इसे पूरी तरह से रिप्लेस कर दिया जाएगा। देश की सरकार ने क्लास साइज छोटा करने, टीचर्स की नई पोस्ट क्रिएट करने, हायर एजुकेशन में सीटें बढ़ाने, स्टूडेंट्स के लिए ग्रांट बढ़ाने और बिल्डिंग्स के रेनोवेशन के लिए फंड देने का भी प्रॉमिस किया है। ये रियायतें 17 अक्टूबर को फ्रांस में हुए कई सालों के सबसे भीषण उपद्रव के बाद दी गई हैं। यह तब है जबकि एजुकेशन और बढ़ती महंगाई को लेकर हो रहे प्रोटेस्ट दंगे और लूटपाट में बदल गए थे।

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दो ग्रुप्स ने रियायतों का समर्थन किया

AP के अनुसार हाई स्कूल स्टूडेंट्स के दो ग्रुप्स ने गवर्नमेंट की कुछ रियायतों का समर्थन तो किया, लेकिन प्रोटेस्ट जारी रखने का आह्वान किया। सरकार द्वारा इन कदमों के अनाउंसमेंट से पहले, सोमार को इन ग्रुप्स के रिप्रेजेंटेटिव्स ने पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नू से मीटिंग की थी। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर को और अधिक प्रोटेस्ट्स की प्लानिंग है, जिसके बाद 5 नवंबर को लेबर यूनियन्स ने कंट्रीवाइड स्ट्राइक और प्रोटेस्ट का आह्वान किया है।

पारकोर्सअप में बदलाव किया गया

पारकोर्सअप के जरिए स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटीज और हायर एजुकेशन के अन्य कोर्सेज में एप्लाई कर सकते हैं और उन्हें एडमिशन से जुड़े डिसीजन मिलते हैं। फ्रांस के हायर एजुकेशन मिनिस्ट्री के अनुसार, इस साल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रिकॉर्ड 10.5 लाख लोगों ने अप्लाई किया। स्टूडेंट्स ने इस सिस्टम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इसमें सिलेक्शन के क्राइटेरिया क्लियर नहीं हैं और मनपसंद कोर्सेज तक सबको बराबर एक्सेस नहीं है। 2027 के एडमिशन राउंड के लिए अनाउंस चेंजेज के तहत, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को सिलेक्शन के ज्यादा डिटेल्ड क्राइटेरिया पब्लिक करने होंगे। साथ ही, अगर किसी एप्लीकेशन को रिजेक्ट किया जाता है, तो प्लेटफॉर्म पर उसके कारण भी बताए जाएंगे। इसके अलावा अगर एप्लीकेंट पूछें तो इंस्टीट्यूट्स को अपने डिसीजन के पीछे की वजह बतानी होगी।

कमेटी में छात्र और टीचर्स होंगे

सरकार ने कहा है कि स्टूडेंट्स और टीचर्स को शामिल करके एक कमेटी बनाई जाएगी, जो नवंबर के एंड तक एक नए सिस्टम के लिए शुरुआती सुझाव देगी। अगर जरूरत पड़ी तो इन चेंजेज को लागू करने के लिए कानून भी लाया जा सकता है।

मैक्रों के कार्यकाल में बदलावों की उम्मीद कम

हालांकि, 2028 की टाइमलाइन का मतलब यह है कि प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों के मौजूदा टर्म के दौरान नया सिस्टम तैयार होने की संभावना कम है। मैक्रों 2027 में लगातार तीसरी बार प्रेसिडेंट पद के लिए इलेक्शन नहीं लड़ सकते, इसलिए इस धोषणा को लागू करने की जिम्मेदारी अगले प्रेसिडेंट और सरकार की होगी।

आगे चल रहीं हैं विपक्षी नेता

AP की रिपोर्ट के अनुसार अगले साल 18 अप्रैल को होने वाले राष्ट्रपति के फर्स्ट राउंड में फार-राइट लीडर मरीन ले पेन पोलिंग में सबसे आगे चल रही हैं। इलेक्शन का सेकंड राउंड यानी रनऑफ 2 मई को होना है। उनकी पार्टी 'नेशनल रैली' ने इस असंतोष का फायदा उठाने की कोशिश की है। पार्टी खुद को लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने वाली फोर्स के रूप में प्रेजेंट कर रही है और वोटर्स से अपील कर रही है कि वे अपने गुस्से को प्रेसिडेंट पद के लिए उनके सपोर्ट में बदल दें।नया प्लेटफॉर्म अभी तैयार नहीं हुआ है और लीगल चेंजेज को लेकर भी सिचुएशन क्लियर नहीं है। ऐसे में जब सरकार छात्रों के प्रोटेस्ट खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है, तब भी कई अहम सवालों के उत्तर नहीं मिल सके हैं।

यह नुकसान हुआ प्रोटेस्ट्स के दौरान

AP के अनुसार, प्रोटेस्टर्स ने आगजनी की, दुकानों में लूटपाट की, पुलिस से झड़प की और पब्लिक बिल्डिंग्स पर अटैक किए। कुछ ग्रुप्स ने मार्सेई के सिटी हॉल में धावा बोल दिया, जबकि लिमोगेस के 19वीं सदी के टाउन हॉल में लगी आग के कारण उसकी रूफ और क्लॉक टॉवर ढह गए। इन प्रोटेस्ट्स के सिलसिले में लगभग 2,400 लोगों को अरेस्ट किया गया, जबकि लाखों लोगों ने पीसफुल मार्च में हिस्सा लिया था। सितंबर के मिड में स्कूलों को बंद कराने यानी ब्लॉकेड से शुरू हुआ यह मूवमेंट अब एजुकेशन के दायरे से बाहर निकलकर उन वर्कर्स तक भी पहुंच गया है, जो बढ़ती महंगाई से राहत की मांग कर रहे हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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