Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

सऊदी अरब ने हूतियों को दिया 1 अरब डॉलर का ऑफर, ईरान बना मध्यस्थ, तेहरान में हुई सीक्रेट मीटिंग, पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी शामिल

इजराइली मीडिया का दावा, सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान हरक्यूलिस विमान में लेकर गए पैसा, युद्धविराम के लिए ईरान में मीटिंग, तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन भी मौजूद, सऊदी एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमलों से नुकसान।  
सऊदी अरब ने हूतियों को दिया 1 अरब डॉलर का ऑफर, ईरान बना मध्यस्थ, तेहरान में हुई सीक्रेट मीटिंग, पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी शामिल
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन

 तेल अवीव। इजराइली मीडिया ने खाड़ी क्षेत्र के डिप्लोमैटिक सोर्सेज के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब ने यमन के हूती ग्रुप को 1 बिलियन डॉलर देने की पेशकश की है। यह ऑफर ईरान की मीडिएशन में हुए एक अरेंजमेंट के तहत किया गया है। इसका मकसद सीजफायर लागू करना और सऊदी अरब पर हो रहे अटैक्स को रोकना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान हूतियों के साथ सीजफायर पर बात करने के लिए तेहरान गए थे। बताया जा रहा है कि इस अरेंजमेंट के तहत ईरान के जरिए हूती ग्रुप को 1 बिलियन डॉलर का अमाउंट दिया जाना है। एक डिप्लोमैटिक सोर्स ने दावा किया है कि सऊदी मंत्री यह रकम अपने साथ 'हरक्यूलिस' मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में रखकर तेहरान लाए थे। हालांकि, सऊदी के अफसरों ने इस बात को कन्फर्म नहीं किया है कि कोई अमाउंट ट्रांसफर की गई है या नहीं। 

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें! ट्रंप बोले- समझौता या हमला, अब होगा फैसला

तुर्किये- पाकिस्तान भी डील में हैं शामिल

खबरों के मुताबिक, इस बातचीत में तुर्किये के इंटेलिजेंस चीफ इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर शामिल हुए। इनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल मोहसेन रेजाई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सीनियर ऑफिशियल्स भी मौजूद थे। रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब के एयरपोर्ट्स और ऑयल इंस्टॉलेशंस पर बढ़ते अटैक्स के बीच ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मीडिएशन की पेशकश की है। इन अटैक्स की वजह से सऊदी अरब को आथिर्क नुकसान उठाना पड़ा है।

तेल टैंकरों पर हमलों ने क्रूड निर्यात को गड़बड़ किया

होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर्स पर ईरानी हमलों ने गल्फ रीजन से तेल निर्यात को डिस्टर्ब कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस विजिट का जिक्र करते हुए कहा, डिफेंस मिनिस्टर प्रिंस खालिद बिन सलमान और 'मक्का जॉइंट डिफेंस अलायंस' (Mecca Joint Defence Alliance) के सदस्य देशों के प्रतिनिधि की तेहरान विजिट, 'नाटो-स्टाइल' के इस अलायंस की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद मौजूदा क्राइसिस से जुड़े पक्षों के बीच टेंशन कम करना। इस प्रयास में डायलॉग और डिप्लोमैटिक सॉल्यूशन को प्रमोट करना तथा कतर और पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मीडिएशन एफर्ट्स को सपोर्ट करना है।

रकम के ट्रांसफर की पुष्टि नहीं हो सकी

इजराइली मीडिया से बात करते हुए एक सऊदी ऑफिशियल ने फाइनेंशियल ट्रांसफर को कन्फर्म नहीं किया है। यह जरूर कहा कि हूतियों के साथ विवाद का एक मुख्य हिस्सा तीन साल पहले हुए एग्रीमेंट्स को इम्प्लीमेंट करने से जुड़ा है। इन समझौतों के तहत सऊदी अरब को एक सेटलमेंट तक पहुंचने की कोशिश के रूप में हूतियों को सीधे आर्थिक सहायता देनी थी। इस फंडिंग का उद्देश्य अन्य बातों के अलावा, हूतियों के कंट्रोल वाले एरियाज में पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज को सैलरी देना और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर का रीबिल्ड करना था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बदले में हूतियों से यह उम्मीद थी कि वे सीजफायर जारी रखेंगे और सऊदी अरब पर हमले बंद कर देंगे।

पुराने समझौते का हवाला देकर किया अटैक

हाल के महीनों में, हूतियों ने अपने अटैक्स को सही ठहराने के लिए करने के लिए यह आरोप लगाया है कि सऊदी अरब पहले हुए समझौते से मुकर गया है।हालांकि, खबरों के अनुसार सऊदी अरब का स्टैंड यह है कि वह मिलिट्री ब्लैकमेल के प्रेशर में किसी नए सीजफायर के लिए तैयार नहीं होगा। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रियाद ने हूतियों को तब तक फंड देने का विरोध किया है, जब तक कि वे यमन की इंटरनेशनली रिकॉग्नाइज्ड गवर्नमेंट (जिसे सऊदी अरब का सपोर्ट प्राप्त है) से छीने गए क्षेत्र को वापस नहीं कर देते।

ईरान नहीं चाहता क्षेत्र में अमेरिका-इजराइल का दखल

इजराइली मीडिया के अनुसार तेहरान में हुई यह मीटिंग 'मक्का जॉइंट डिफेंस अलायंस' (Mecca Joint Defence Alliance) के प्रतिनिधियों और ईरानी लीडरशिप के बीच पहली ऑफिशियल मीटिंग थी। बताया जा रहा है कि इसका फ्रेमवर्क पिछले हफ्ते पाकिस्तानी आर्मी चीफ की तेहरान विजिट के दौरान तैयार हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान खुद को एक रीजनल डिप्लोमैटिक मीडिएटर के रूप में एस्टेब्लिश करना चाहता है। वह इस क्षेत्र में अमेरिका या इजराइल के मिलिट्री इंटरवेंशन का विरोध करता है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

Latest Posts