PU Special :मध्यप्रदेश में डेढ़ करोड़ वाहनों के रिकॉर्ड अधूरे, नाम ट्रांसफर और रिन्यूअल में आ रही परेशानी

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। पुराने रिकॉर्ड में व्हील बेस, हॉर्स पावर और बॉडी टाइप जैसी जानकारियां दर्ज नहीं होने से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में वाहन मालिकों को डीलर से तकनीकी जानकारी लेकर आरटीओ के जरिए ग्वालियर स्थित एडमिन ऑफिस से मंजूरी लेनी पड़ रही है। परिवहन विभाग के मुताबिक, इस समस्या का मैन्युअल समाधान निकाला गया है, जिसमें तीन से चार दिन का समय लग रहा है।
पुराने रिकॉर्ड में छूटी जानकारी बनी बाधा
शाहपुरा निवासी रामकिशोर वर्मा को अपनी कार बेचनी थी। उन्होंने नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन किया तो उसमें आपत्ति आ गई। आरटीओ पहुंचने पर पता चला कि वर्ष 2010 में कार खरीदते समय डीलर ने रिकॉर्ड में गाड़ी की पूरी जानकारी दर्ज नहीं की थी। अब ऑनलाइन प्रक्रिया में अधूरी जानकारी होने के कारण सॉफ्टवेयर आवेदन रिजेक्ट कर देता है। पुराने रिकॉर्ड की जानकारी के लिए फाइल ग्वालियर भेजी गई, जहां से जवाब आने में 20 दिन लग गए।
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डेढ़ करोड़ से ज्यादा वाहनों के रिकॉर्ड अधूरे
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदेश में डेढ़ करोड़ से ज्यादा वाहनों के रिकॉर्ड में व्हील बेस, हॉर्स पावर और बॉडी टाइप जैसी तकनीकी जानकारियां अधूरी हैं। इसका असर वाहन-4 पोर्टल पर होने वाले कामकाज पर पड़ रहा है। गाड़ी बेचने या खरीदने के बाद नामांतरण कराने और रिन्यूअल के लिए आवेदन करने वाले वाहन मालिकों को इन कमियों के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है, जबकि उनके पास गाड़ी के दस्तावेज सही हैं।
वर्ष 2002 से 2024 के रिकॉर्ड में समस्या
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यह समस्या वर्ष 2002 से 2024 के बीच पंजीकृत वाहनों के डेटा से जुड़ी है। इस अवधि में नोएडा की स्मार्ट चिप कंपनी परिवहन विभाग के ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीयन से जुड़े काम देखती थी। बताया जा रहा है कि कई वाहनों के रिकॉर्ड में नाम, इंजन नंबर और चेसिस नंबर जैसी बुनियादी जानकारियां दर्ज हैं, लेकिन तकनीकी विवरण खाली रह गए या सही तरीके से दर्ज नहीं हुए। अब वाहन-4 पोर्टल पर जरूरी जानकारियों का मिलान होने से ये कमियां सामने आ रही हैं।
डीलर से बनवाना पड़ रहा तकनीकी जानकारी का प्रमाण
वाहन के मालिकाना हक में बदलाव या रिन्यूअल के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर अधूरे रिकॉर्ड के कारण प्रक्रिया रुक जाती है या आवेदन अस्वीकार हो जाता है। इसके बाद वाहन मालिक को संबंधित डीलर से संपर्क करना पड़ता है। डीलर से लेटरहेड पर गाड़ी की विस्तृत तकनीकी जानकारी बनवाकर दस्तावेज तैयार कराने होते हैं, ताकि रिकॉर्ड में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
आरटीओ से ग्वालियर भेजी जा रही फाइल
डीलर से तकनीकी जानकारी मिलने के बाद वाहन मालिक को दस्तावेज संबंधित आरटीओ या डीटीओ कार्यालय में जमा कराने पड़ते हैं। इसके बाद कार्यालय से फाइल तैयार कर ग्वालियर स्थित एडमिन ऑफिस भेजी जाती है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी हो पाती है। इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर तीन से चार दिन लग रहे हैं, जबकि रामकिशोर वर्मा के मामले में पुरानी जानकारी आने में 20 दिन लग गए थे।
स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड सुधारने की सुविधा नहीं
वाहन-4 पोर्टल पर ट्रांसफर, रिन्यूअल, फिटनेस और आरसी में संशोधन जैसी सेवाओं के लिए जरूरी जानकारियों का मिलान किया जाता है। पुराने रिकॉर्ड में सुधार करने का अधिकार स्थानीय कार्यालयों के पास नहीं होने के कारण मैन्युअल प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। हालांकि, अधूरे डेटा वाले वाहनों में से कितने मालिकों के आवेदन वास्तव में प्रभावित हुए हैं, इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
परिवहन विभाग ने निकाला मैन्युअल समाधान
परिवहन विभाग की उप आयुक्त किरण शर्मा ने बताया कि इस समस्या का मैन्युअल समाधान निकाला गया है। इसमें तीन से चार दिन लग रहे हैं, लेकिन लोगों का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वाहन-4 पोर्टल में बदलाव करना संभव नहीं है।




















