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भारत पर 100% टैरिफ का खतरा! ट्रंप-मोदी बातचीत से निकलेगा रास्ता? रूस वाले बिल पर नवारो का बयान

अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने वाले बिल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भारत पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क की चर्चा तेज है। हालांकि यह टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। पीटर नवारो ने कहा है कि ट्रंप और पीएम मोदी बातचीत से इस मुद्दे का हल निकाल सकते हैं।
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भारत पर 100% टैरिफ का खतरा! ट्रंप-मोदी बातचीत से निकलेगा रास्ता? रूस वाले बिल पर नवारो का बयान
पीटर नवारो

अमेरिका। अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी के बीच भारत पर टैरिफ का खतरा चर्चा में है। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े लिंडसे ग्राहम बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इस बिल में रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है। भारत भी ऐसे देशों में शामिल है। इसी मुद्दे पर व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी रिश्ते हैं और दोनों नेता इस मामले का समाधान निकाल सकते हैं।

क्यों मंडरा रहा है टैरिफ का खतरा?

रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पहले भी अमेरिका के निशाने पर रहा है। अब अमेरिकी सीनेट से रूस प्रतिबंध बिल पास होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। इसमें भारत और चीन का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा। बिल को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलनी है। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और दूसरी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होंगी।

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नवारो ने मोदी-ट्रंप रिश्तों पर क्या कहा?

भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर सवाल पूछे जाने पर पीटर नवारो ने सीधे तौर पर कोई नई नीति घोषित नहीं की। उन्होंने कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता इस मामले को आपस में सुलझा लेंगे। नवारो ने रूस के साथ भारत के बढ़ते तेल कारोबार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़े स्तर पर तेल खरीदना शुरू किया। उनके मुताबिक, रूस से होने वाला यह कारोबार मॉस्को को आर्थिक मदद देता है। 

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क्या भारत को मिल सकती है राहत?

बिल में कुछ देशों के लिए राहत का रास्ता भी रखा गया है। इसमें उन देशों को छूट देने की बात है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम हिस्सा आयात करते हैं और रूसी गैस पर अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत के लिए आगे की तस्वीर अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर काफी हद तक निर्भर करेगी। टैरिफ की अंतिम दर तय करने में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की भूमिका होगी।

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बिल पास हुआ लेकिन टैरिफ अभी दूर

रूस प्रतिबंध बिल को सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों से मंजूरी मिली है। इसमें रूस के बड़े अधिकारियों और उसकी रक्षा व्यवस्था को मदद देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। अब नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर है।

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फिलहाल भारत के लिए सबसे अहम बात यही है कि बिल सीनेट से पास होने के बावजूद 100 फीसदी टैरिफ अभी वास्तविकता नहीं बना है। आने वाले दिनों में मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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