चालान नहीं भरा तो गाड़ी पर कार्रवाई! सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए ये सख्त कदम

ट्रैफिक नियम तोड़कर चालान कटने के बाद उसे नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बकाया ई-चालान की वसूली के लिए सख्त और असरदार कदम उठाने को कहा। कोर्ट के सामने पेश जानकारी के मुताबिक करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान की राशि अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर वसूली के लिए बाकी थी, जबकि करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी थी।
सिर्फ चालान काटना काफी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
यह मामला एस. राजसीकरण बनाम भारत संघ से जुड़ी 2012 की सड़क सुरक्षा याचिका में हुई सुनवाई के दौरान सामने आया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि हजारों-लाखों ई-चालान जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती यह है कि इन जुर्मानों की वसूली कैसे की जाए। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसा सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया, जिससे लगातार बकाया रहने वाले चालानों की वसूली की जा सके। साथ ही, कोर्ट ने अलग-अलग व्यावहारिक उपायों पर विचार करने को कहा।
रैंडम चेकिंग में बकाया मिला तो गाड़ी पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि सड़कों पर वाहनों की रैंडम चेकिंग की जाए। जांच के दौरान किसी वाहन पर बकाया चालान पाए जाने और भुगतान न होने की स्थिति में जरूरी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें वाहन जब्त करने का कदम भी शामिल है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बकाया चालान वाले वाहन को हर समय सड़क से उठाकर जब्त कर लिया जाएगा। कोर्ट की चर्चा खास तौर पर जांच के दौरान ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी थी, जिन पर चालान बकाया है।
गाड़ी से जुड़ी कई सेवाएं रोकने का सुझाव
कोर्ट ने सिर्फ वाहन जब्ती की बात नहीं की, बल्कि वाहन से जुड़ी कई दूसरी सेवाओं पर रोक जैसे उपायों पर भी विचार किया। इनमें बकाया चालान जमा होने तक वाहन के रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण रोकना, स्वामित्व हस्तांतरण रोकना और डुप्लीकेट दस्तावेज जारी न करना शामिल है। इसके अलावा बकाया चालान वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने, फिटनेस सर्टिफिकेट और PUC सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाने तथा ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने का सुझाव भी सामने आया। पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने की संभावना पर भी कोर्ट ने चर्चा की।
बिजली बिल से जोड़ने का भी सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए एक और तरीका सुझाया। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने चालान नहीं भरा है, उनके बकाया को बिजली बिल के साथ जोड़ने के विकल्प पर भी काम किया जा सकता है। यह सुझाव भी इस बात को ध्यान में रखकर दिया गया कि सिर्फ ई-चालान जारी करने से पैसा अपने आप वसूल नहीं हो रहा। हालांकि, बिजली बिल के साथ चालान जोड़ने समेत इन उपायों का वास्तविक अमल राज्यों और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल इन्हें बकाया चालान की वसूली के संभावित तरीकों के तौर पर सामने रखा गया है।
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देशभर में बकाया चालानों का बड़ा आंकड़ा
सुनवाई के दौरान सामने आए आंकड़ों ने भी तस्वीर साफ की। अदालत को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर लगभग 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान बकाया थे, जबकि करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी थी। यानी बड़ी रकम अभी भी वसूल की जानी बाकी है। कोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था की जमीन पर स्थिति जानने पर भी जोर दिया। पीठ ने अमिकस क्यूरी से पुराने निर्देशों, उनकी समयसीमा और अब तक हुए पालन की स्थिति का चार्ट तैयार करने को कहा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सिर्फ कागजों पर आदेश बने रहने के बजाय उनके वास्तविक असर को देखा जाना चाहिए।
चालान को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई के बाद बकाया ई-चालान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर ऐसे वाहन मालिकों के लिए मामला महत्वपूर्ण है, जिन पर लंबे समय से ट्रैफिक चालान बाकी हैं। कोर्ट ने राज्यों से वसूली के लिए ज्यादा असरदार सिस्टम बनाने और उपलब्ध कानूनी-प्रशासनिक उपायों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। ध्यान देने वाली बात: 28 सितंबर 2026 की सुनवाई की रिपोर्टों में करीब 45,000 करोड़ रुपये बकाया और करीब 25,000 करोड़ रुपये वसूल होने की जानकारी दी गई है; इसलिए 23,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा इस हालिया सुनवाई के आंकड़ों से मेल नहीं खाता।




















