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होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार ईरान, लेकिन ट्रंप के सामने रख दीं 6 शर्तें… क्या है पूरा प्लान ?

ईरान और ओमान के बीच रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात को मैनेज करने की नई व्यवस्था को लेकर बातचीत सकारात्मक रही है। इससे स्ट्रेट के जरिए समुद्री आवाजाही फिर शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, ईरान ने होर्मुज़ को पूरी तरह खोलने से पहले अमेरिका के सामने कई शर्तें रख दी हैं।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार ईरान, लेकिन ट्रंप के सामने रख दीं 6 शर्तें… क्या है पूरा  प्लान ?
होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार ईरान, लेकिन ट्रंप के सामने रख दीं 6 शर्तें

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट से समुद्री यातायात मैनेज करने की नई व्यवस्था पर बातचीत सकारात्मक रही है। ईरान ने स्ट्रेट को फिर से खोलने से पहले अमेरिका के सामने छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करने, प्रतिबंध हटाने और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देने जैसी मांगें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक तौर पर रखी गई सभी शर्तें बातचीत की मेज पर उसी रूप में जरूरी नहीं होंगी। यह मांगें ईरान की बातचीत की रणनीति और अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश भी हो सकती हैं। इसके बावजूद उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर कोई समझौता हो सकता है।

ईरान-ओमान के बीच नए समुद्री मार्ग पर बनी सहमति की उम्मीद

हाल के दिनों में ईरान और ओमान के बीच बातचीत होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए संभावित नए समुद्री मार्ग पर केंद्रित रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में इस नए मार्ग की जिम्मेदारी ईरान और ओमान साझा करेंगे। दोनों देशों के बीच बातचीत को सकारात्मक बताया गया है, जिससे उन जहाजों और देशों के लिए उम्मीद जगी है जो होर्मुज के जरिए समुद्री यातायात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इसी बीच ईरान ने सार्वजनिक तौर पर कई ऐसी मांगें रख दी हैं, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट खोलने से जोड़ दिया गया है। इनमें कुछ मांगें 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन के दायरे से आगे जाती हैं, जबकि कुछ पुरानी मांगों को अब स्ट्रेट खोलने की शर्त के रूप में सामने रखा गया है।

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अमेरिका के सामने ईरान ने रखीं छह बड़ी शर्तें

  • धमकी और अपमानजनक बयान बंद करने की मांग
  • ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की शर्त
  • नाकाबंदी हटाने और अमेरिकी सेनाओं की वापसी की मांग
  • युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग
  • ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग
  • जब्त संपत्तियां वापस करने की मांग

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जून का समझौता क्यों टूटा, अब क्या चाहता है ईरान? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की यह रणनीति बातचीत को लंबा खींचने की कोशिश भी हो सकती है। जून में हुए समझौता ज्ञापन पर ईरान ने बहुत जल्दी सहमति दे दी थी। यह समझौता कुछ ही दिनों तक चला और हस्ताक्षर के कुछ दिनों बाद जवाबी हमले दोबारा शुरू हो गए। ईरान में कुछ लोगों का तर्क है कि अगर बातचीत को और लंबा खींचा जाता तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शायद ईरानी ठिकानों पर हमले का आदेश इतनी जल्दी नहीं देते। उनका मानना है कि उस स्थिति में तेल की कीमतें और बढ़ सकती थीं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ज्यादा नुकसान होता। इसलिए ईरान अब पिछली स्थिति से सबक लेते हुए बातचीत में ज्यादा दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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