अफगानिस्तान के हेलमंद में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक, महिलाओं और बच्चे समेत 9 नागरिकों की मौत, कई घायल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद अब एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आज अफगानिस्तान के हेलमंद और कुनार प्रांत में पाकिस्तानी हवाई हमलों की खबर सामने आई है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम 9 नागरिकों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। हेलमंद में रिहायशी मकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव में नया मोड़
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही सीमा पार हिंसा, आतंकवादी गतिविधियों और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का कहना रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकवादी संगठन पाकिस्तान में हमलों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी ओर, अफगान तालिबान सरकार पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करती रही है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और सीमा पर सैन्य कार्रवाई की घटनाओं ने स्थिति को और जटिल कर दिया है।
हेलमंद में दो रिहायशी मकानों पर हमले का दावा
अफगानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थित हेलमंद प्रांत में गुरुवार को पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की जानकारी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, गरम्सिर जिले के सफर इलाके में दो नागरिक मकानों को निशाना बनाया गया। अफगान अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में नागरिकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। शुरुआती जानकारी में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 बताए जाने की जानकारी सामने आई।
हेलमंद के अलावा अफगानिस्तान के पूर्वी कुनार प्रांत में भी पाकिस्तानी हवाई हमले की जानकारी सामने आई है। इससे पहले सितंबर में कुनार में हुए एक हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने तीन नागरिकों की मौत और चार लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी। मृतकों में एक पुरुष, एक महिला और एक बच्ची शामिल थी। कुनार में हुए हमलों के बारे में पाकिस्तान ने कहा था कि उसकी कार्रवाई का निशाना आतंकवादी ठिकाने थे। वहीं अफगान अधिकारियों ने रिहायशी इलाकों में नागरिकों के हताहत होने का आरोप लगाया था। दोनों पक्षों के दावों में अंतर बना हुआ है।
पाकिस्तान का क्या कहना है?
पाकिस्तान की ओर से हालिया सैन्य कार्रवाइयों को सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों से जोड़कर देखा गया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादी समूह अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं। सितंबर में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई के दौरान 28 आतंकवादियों को मारने का दावा किया था। वहीं अफगान पक्ष ने नागरिकों के मारे जाने की बात कही। संयुक्त राष्ट्र ने भी उस कार्रवाई में कुनार में तीन नागरिकों की मौत की पुष्टि की थी। यानी सीमा पार सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।
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अफगानिस्तान ने जताया विरोध
अफगान तालिबान सरकार लगातार पाकिस्तान की ओर से की जा रही सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रही है। काबुल का कहना है कि अफगान क्षेत्र में हवाई हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन हैं। वहीं पाकिस्तान का तर्क है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य उन संगठनों और ठिकानों को निशाना बनाना है जिन्हें वह पाकिस्तान में होने वाले हमलों के लिए जिम्मेदार मानता है। यही आरोप-प्रत्यारोप अब दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ा तनाव बिंदु बन गया है।
सीमा विवाद के पीछे क्या है असली वजह?
अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई वर्षों से चले आ रहे सुरक्षा और सीमा संबंधी विवाद हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, 2026 में सीमा पार हिंसा और आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
आम लोगों पर सबसे बड़ा असर
सीमा विवाद और सैन्य कार्रवाई का सबसे सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। रिहायशी इलाकों में हमलों की खबरों के बीच महिलाओं और बच्चों के हताहत होने की जानकारी ने चिंता बढ़ाई है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, 2026 में अफगानिस्तान में सीमा पार सशस्त्र हिंसा से 1,100 से अधिक नागरिकों की मौत या घायल होने की स्थिति सामने आई है। ऐसे हालात में स्थानीय आबादी के लिए सुरक्षा, इलाज और विस्थापन बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
क्या और बढ़ेगा अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव?
हालिया घटनाओं से साफ है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। सितंबर में भी दोनों देशों के बीच एयरस्ट्राइक, ड्रोन और सीमा संघर्ष से जुड़े कई घटनाक्रम सामने आए हैं। पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच बातचीत और मध्यस्थता के प्रयासों के बावजूद सुरक्षा संबंधी विवाद बने हुए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश सैन्य टकराव को सीमित रख पाएंगे या सीमा पर तनाव और बढ़ेगा? आने वाले दिनों में दोनों सरकारों के आधिकारिक बयान और जमीन पर सैन्य गतिविधियां इस स्थिति की दिशा तय करने में अहम होंगी।


















