चीन बना रहा 'न्यूक्लियर टैंक' का प्लान! 450 KM तक मार करने वाली रेलगन, 2045 के बाद का लक्ष्य

नई दिल्ली। चीन के डिफेंस रिसर्चर्स ने भविष्य के एक ऐसे युद्धक टैंक का कॉन्सेप्ट पेश किया है, जो परमाणु ऊर्जा से संचालित हो सकता है। करीब 60 टन के इस मुख्य युद्धक टैंक में 10 मेगावाट क्लास का छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर और 50 मेगाजूल की रेलगन लगाने की योजना बताई गई है। रिसर्च के मुताबिक, यह रेलगन करीब 3.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रोजेक्टाइल दाग सकती है और इसकी संभावित मारक क्षमता करीब 450 किलोमीटर तक हो सकती है। हालांकि, यह फिलहाल एक रिसर्च स्टडी है। चीन की ओर से इस तरह के टैंक के निर्माण, फंडिंग या आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है।
तीन चरणों में तैयार करने का प्लान
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम को एक साथ विकसित करने के बजाय तीन चरणों में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। पहला चरण 2035 से पहले का है। इसमें मौजूदा टैंक प्लेटफॉर्म पर 10 मेगाजूल की रेलगन लगाने की बात कही गई है। इसकी अनुमानित रेंज करीब 150 किलोमीटर होगी। इस चरण में पावर के लिए 1500 हॉर्सपावर का डीजल जनरेटर, सुपरकैपेसिटर और फ्लाईव्हील जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसका मकसद मौजूदा तकनीक के जरिए इलेक्ट्रिक हथियार प्रणाली का परीक्षण करना है।
2045 तक बढ़ेगी रेलगन की ताकत
दूसरे चरण में रेलगन की क्षमता को बढ़ाकर 20 मेगाजूल करने का प्रस्ताव है। इसकी अनुमानित रेंज करीब 300 किलोमीटर बताई गई है। इस चरण में 2000 हॉर्सपावर के डीजल जनरेटर और करीब 5 टन एडवांस एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है। रिसर्च में सॉलिड-स्टेट बैटरी, सुपरकंडक्टिंग स्टोरेज और वाहन माइक्रोग्रिड जैसी तकनीकों को भी शामिल करने की बात कही गई है। इस चरण का मुख्य फोकस ऊर्जा के भंडारण और प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
तीसरे चरण में परमाणु ऊर्जा से चलेगा टैंक
तीसरे और अंतिम चरण में टैंक को परमाणु ऊर्जा से संचालित करने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 2 घन मीटर जगह में फिट होने वाला 10 मेगावाट क्लास का लिक्विड-मेटल-कूल्ड छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर इस्तेमाल करने की योजना बताई गई है। रिसर्च के मुताबिक, इससे 50 मेगाजूल की रेलगन को ऊर्जा मिल सकती है। प्रस्तावित सिस्टम प्रोजेक्टाइल को करीब 3.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दागकर लगभग 450 किलोमीटर दूर तक मार कर सकता है।
सबसे बड़ी चुनौती रिएक्टर को सुरक्षित रखना
परमाणु रिएक्टर को इतने छोटे प्लेटफॉर्म में फिट करना इस पूरे कॉन्सेप्ट की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक है। टैंक में मौजूद क्रू को रेडिएशन से बचाने के लिए शील्डिंग की जरूरत होगी, लेकिन उसका वजन भी सीमित रखना पड़ेगा। इसके अलावा रेलगन को कम समय में बहुत ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। ऊर्जा भंडारण, गर्मी को नियंत्रित करना, ऑफ-रोड झटकों के बीच रिएक्टर की सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता भी बड़ी चुनौतियां हैं।
क्या बदल सकती है जमीनी लड़ाई?
अगर भविष्य में ऐसा सिस्टम वास्तविक रूप लेता है तो पारंपरिक टैंक की भूमिका बदल सकती है। आम तौर पर टैंक नजदीकी और सीधी फायरिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि प्रस्तावित रेलगन की सैकड़ों किलोमीटर की रेंज इसे लंबी दूरी के हथियार प्लेटफॉर्म में बदल सकती है। हालांकि, फिलहाल इसे एक शोध प्रस्ताव के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसके लिए आगे सिमुलेशन, तकनीकी परीक्षण और कई व्यावहारिक चुनौतियों को पार करना होगा। खास तौर पर युद्ध के दौरान परमाणु रिएक्टर के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में रेडिएशन का जोखिम भी एक गंभीर सवाल बना रहेगा।




















