सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मौत की सजा, युद्ध अपराधों में कोर्ट का बड़ा फैसला

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने उन्हें युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसी मामले में उनके छोटे भाई माहेर अल-असद और ममेरे भाई आतिफ नजीब को भी मौत की सजा दी गई है।
ममेरे भाई आतिफ नजीब को भी मौत की सजा
आतिफ नजीब सीरियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में बशर अल-असद के शासन के दौरान वह दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में पॉलिटिकल सिक्योरिटी ब्रांच के प्रमुख थे। नजीब पर दारा में सरकार की उस कार्रवाई का नेतृत्व करने का आरोप था, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन भड़के और धीरे-धीरे सीरिया में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो गई।
बच्चों की हत्या और यातना का आरोप
अदालत ने आतिफ नजीब को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना। अदालत के मुताबिक, नजीब ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों की जानबूझकर हत्या की और ऐसी यातनाएं दीं, जिनसे लोगों की मौत हुई। इन अपराधों को गंभीर मानते हुए अदालत ने उन्हें सबसे कठोर सजा यानी मौत की सजा सुनाई।
दिसंबर 2024 में परिवार के साथ मॉस्को भागे थे असद
दिसंबर 2024 में विद्रोही ताकतों के दमिश्क तक पहुंचने के बाद बशर अल-असद अपने परिवार के साथ सीरिया छोड़कर मॉस्को चले गए थे। वहीं, आतिफ नजीब सीरिया में ही रहे और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया। नजीब उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्हें असद शासन के पतन के बाद सीरिया में रहकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
50 साल से ज्यादा चला असद परिवार का शासन
सीरिया में असद परिवार का शासन पांच दशक से ज्यादा समय तक रहा। पहले हाफेज अल-असद ने सत्ता संभाली और उनके बाद उनके बेटे बशर अल-असद राष्ट्रपति बने। 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। सरकार की कार्रवाई के बाद यह संघर्ष बढ़ता गया और देश लंबे गृहयुद्ध में फंस गया।
गृहयुद्ध में लाखों लोगों की मौत
सीरिया के करीब 14 साल लंबे संघर्ष में लाखों लोगों की जान गई। बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और करोड़ों की आबादी वाले देश में भारी तबाही हुई। गृहयुद्ध के दौरान लाखों सीरियाई नागरिकों को अपना घर छोड़ना पड़ा। बड़ी संख्या में लोग तुर्की, लेबनान, जॉर्डन और यूरोप के अलग-अलग देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए।
असद शासन की विरासत पर अब भी सवाल
बशर अल-असद के शासन को लेकर सीरिया में लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघन, हिंसा और दमन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। गृहयुद्ध के दौरान सरकार और अलग-अलग सशस्त्र समूहों पर नागरिकों के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोप लगे।
अब अदालत के इस फैसले के बाद असद शासन के दौरान हुए कथित अपराधों और उसके जिम्मेदार लोगों पर जवाबदेही को लेकर एक नई कानूनी प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।











