लंदन। दुनिया के महासागरों ने पिछले साल इंसानों के साल भर के एनर्जी इस्तेमाल से 40 गुना ज्यादा गर्मी को अपने अंदर समा लिया है। यह थर्मल एनर्जी तब बढ़ी है, जब समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी ज्यादा एसिडिक होता जा रहा है।एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनिया के समुद्रों ने रिकॉर्ड 23 जेटाजूल गर्मी सोख ली। इस वजह से समुद्र का पानी ज्यादा गर्म हो गया है। इससे जलस्तर ऊंचा हो गया है और समुद्री जीवों के लिए माहौल कम अनुकूल होता जा रहा है। थर्मल एनर्जी में यह भारी बढ़ोतरी उस साल इंसानों द्वारा इस्तेमाल की गई कुल एनर्जी से लगभग 40 गुना अधिक थी।
40 साल में 17% ज्यादा एसिडिक हुए महासागर
कोपरनिकस ओशन स्टेट रिपोर्ट के 10वें एडिशन के अनुसार, 1999 से समुद्र का जलस्तर हर साल लगभग 3.8 मिमी बढ़ रहा है। वहीं 2012 से 2025 के बीच यह रफ्तार बढ़कर 4.2 मिमी प्रति वर्ष हो गई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पिछले 40 सालों में दुनिया के महासागर 17% ज्यादा एसिडिक हो गए हैं। दरअसल, महासागरों ने इंसानों द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग एक-तिहाई हिस्सा और ग्रीनहाउस गैस प्रदूषण की वजह से पृथ्वी के सिस्टम में फंसी अतिरिक्त गर्मी का करीब 90% हिस्सा सोख लिया है। रिपोर्ट प्रकाशित करने वाली संस्था मर्केटर ओशन इंटरनेशनल के डायरेक्टर जनरल पियरे बहुरेल ने कहा, समुद्र हमारी आंखों के सामने बदल रहा है। तापमान का बढ़ना, जलस्तर में बढ़ोतरी और इकोसिस्टम का खराब होना, ये सभी बड़े और लंबे समय तक चलने वाले बदलावों के आपस में जुड़े हुए संकेत हैं।
यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ समुद्री हीटवेव
वैज्ञानिकों ने पाया कि यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है, वहां भूमध्य सागर और काला सागर में रिकॉर्ड तोड़ने वाली समुद्री हीटवेव देखी गई हैं। इनमें पानी की सतह के नीचे भी तापमान काफी ज्यादा बना हुआ है और भीषण गर्मी का दौर एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि पश्चिमी भूमध्य सागर में समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जबकि पूर्वी हिस्से में इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार पूरा समुद्र हर दशक में 0.32°C गर्म हो रहा है।
यूरोप में रातें भी हो रहीं गर्म
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी यूरोप में भीषण गर्मी वाली गर्मियों के ठीक बाद सितंबर का महीना भी असामान्य रूप से गर्म रहा है। पिछले हफ्ते स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में तापमान 40°C तक पहुंच गया था। समुद्र के गर्म तटीय पानी से जमीन पर हीटवेव और भी गंभीर हो जाती हैं, क्योंकि रात के समय, जब तापमान कम हो जाना चाहिए, तब भी गर्मी बनी रहती है।
हम नहीं आंक पा रहे समस्या को
बास्क रिसर्च इंस्टीट्यूट 'AZTI' के मरीन इकोलॉजिस्ट एंजेल बोर्जा ने कहा कि इसके असर कई सालों से दिख रहे हैं और निश्चित रूप से और बढ़ेंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि समाज इस समस्या को कम करके आंकता है। उदाहरण के लिए, समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी और चरम मौसम की घटनाओं की मिली-जुली समस्याएं भूमध्य सागर के तट को खत्म कर रही हैं। इसके बाद भी कुछ लोग इन जगहों पर दोबारा निर्माण करने पर जोर देते हैं जिनके निश्चित रूप से खत्म हो जाने की आशंका है।
समुद्री जीवों को भारी नुकसान
इस रिपोर्ट में गर्मी की वजह से समुद्री जीवन को हुए भारी नुकसान का ब्योरा दिया गया है। जनवरी 2023 और सितंबर 2025 के बीच, दुनिया की 84% कोरल रीफ ने ब्लीचिंग-लेवल हीट स्ट्रेस का सामना किया। पिछले 30 सालों में समुद्र के लगभग 5% हिस्से में फाइटोप्लांकटन के बढ़ने के पैटर्न में लगातार बदलाव देखा गया है। ये छोटे जीव फूड वेब का आधार होते हैं और कार्बन के बहाव को नियंत्रित करते हैं।
जानें क्या है जूल
जूल गर्मी मापने की इकाई है। यह उतनी बिजली की मात्रा है जितनी एक वाट के डिवाइस को एक सेकंड तक चलाने के लिए चाहिए। जेटाजूल एक अरब खरब जूल के बराबर होता है।