भोपाल में बुजुर्गों की याददाश्त पर प्रदूषण का असर, बढ़ रहा अल्जाइमर का जोखिम

भोपाल। भोपाल में याददाश्त कमजोर होने, परिचित लोगों को पहचानने और रोजमर्रा के कामों में दिक्कत की शिकायत लेकर बुजुर्ग मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों से बातचीत में सामने आया कि इनमें कई मरीजों को लंबे समय से सांस संबंधी परेशानियां भी रही हैं और वे प्रदूषित हवा के संपर्क में रहे हैं। यह स्थिति अब सिर्फ फेफड़ों तक सीमित स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखी जा रही, बल्कि बुजुर्गों के मस्तिष्क स्वास्थ्य से भी इसका संबंध सामने आ रहा है।
स्थानीय स्तर पर शोध जरूरी
हालांकि डॉक्टरों के मुताबिक किसी मरीज में अल्जाइमर के लिए प्रदूषण को अकेला कारण बताने से पहले स्थानीय स्तर पर और शोध जरूरी है। दूसरी ओर भोपाल स्थित आईसीएमआर-एनआईआरईएच के वैज्ञानिकों के 2022 के मेटा-विश्लेषण में पीएम 2.5 के लंबे समय के संपर्क और डिमेंशिया व अल्जाइमर के बढ़े जोखिम के बीच संबंध मिला। अल्जाइमर के लिए पूल्ड हेजार्ड रेशियो 1.08 रहा।
60 साल से ज्यादा के 7.5 प्रतिशत बुजुर्ग अल्जाइमर के मरीज
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 60 साल से अधिक उम्र के 7.5 प्रतिशत बुजुर्ग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं, मप्र में यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत है। इस आधार पर भोपाल की करीब 28 लाख आबादी में 20 हजार से ज्यादा बुजुर्ग इस बीमारी का शिकार है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2 में भी 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों में न्यूरोकॉग्निटिव डिसऑर्डर की स्क्रीनिंग की जा रही है। इससे बुजुर्गों में याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमता से जुड़ी समस्याओं की पहचान पर बढ़ता फोकस सामने आता है।
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शोध में सामने आया प्रदूषण और अल्जाइमर का संबंध
गांधी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ जेपी अग्रवाल के मुताबिक सीएमआर-एनआईआरईएच, भोपाल के वैज्ञानिकों ने 2022 में वायु प्रदूषण और डिमेंशिया के संबंध पर अलग-अलग देशों में हुए अध्ययनों का मेटा-विश्लेषण किया। इसमें पीएम 2.5, पीएम 10, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों से जुड़े अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। पीएम 2.5 के संपर्क का संबंध ऑल-कॉज डिमेंशिया, अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया से सामने आया। अल्जाइमर के लिए पूल्ड हेजार्ड रेशियो 1.08 रहा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि प्रदूषण के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को अल्जाइमर होगा, बल्कि संयुक्त अध्ययनों में पीएम 2.5 के संपर्क और बीमारी के जोखिम के बीच सांख्यिकीय संबंध मिला।
भोपाल के बुजुर्गों में सांस से दिमाग तक असर
मनोचिकित्सक डॉ. मोनिका वर्मा के मताबिक याददाश्त की समस्या लेकर आने वाले कुछ बुजुर्गों में लंबे समय से सांस संबंधी परेशानी, लगातार खांसी और प्रदूषित वातावरण में रहने का इतिहास भी मिलता है। ऐसे मरीजों में उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, नींद, शारीरिक सक्रियता और अन्य बीमारियों के साथ पर्यावरणीय संपर्क को भी ध्यान में रखना जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण को किसी एक मरीज में अल्जाइमर का अकेला कारण बताना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए लंबे समय तक मरीजों की निगरानी और स्थानीय स्तर पर शोध की जरूरत है।
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बातें भूलना, चेहरे याद न रहना है लक्षण
अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों में हाल की बातें बार-बार भूलना, एक ही सवाल दोहराना, परिचित लोगों के नाम या चेहरे याद न रहना और सामान रखकर भूल जाना शामिल हैं। मरीज को परिचित रास्तों पर भी दिशा समझने में परेशानी हो सकती है। बातचीत के दौरान सही शब्द याद करने में दिक्कत भी संकेत हो सकती है। आगे चलकर दिन, तारीख, समय या जगह को लेकर भ्रम, पैसे के हिसाब और रोजमर्रा के कामों में परेशानी बढ़ सकती है। स्वभाव में बदलाव, चिड़चिड़ापन, सामाजिक गतिविधियों से दूरी और पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि कम होना भी लक्षण हैं।




















