PU Special :वर्ल्ड हार्ट डे आज-दिल के मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच महंगा हुआ इलाज, बीपी-शुगर की दवाएं 10% तक हुईं महंगी

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। विश्व हृदय दिवस पर दिल की सेहत के साथ इलाज के बढ़ते खर्च की चुनौती भी सामने है। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध, वैश्विक आपूर्ति शृंखला और लगातार बढ़ रही महंगाई से दवाओं की लागत भी बढ़ी है। हार्ट समेत कुछ जरूरी दवाओं के सक्रिय औषधीय घटक और कच्चे माल की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी हुई है। मालूम हो कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2018-19 के अध्ययन के आधार पर 18 से 69 वर्ष की आबादी में उच्च रक्तचाप का अनुमानित प्रसार 22.3 प्रतिशत था। एनएचएम की स्क्रीनिंग और एनएफएचएस-5 सर्वे के मुताबिक राज्य में 22 से 25 फीसदी लोग हाईपरटेंशन की चपेट मे हैं।
मप्र में 29 लाख लोग हार्ट संबंधी बीमारियों से त्रस्त
डब्ल्यूएचओ-एसटीईपी अध्ययन के अनुसार, प्रदेश में 29 लाख लोग दिल संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश में 2025 में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 2.20 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप की जांच की गई। इनमें 24.15 लाख लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की पहचान हुई। अगर इसे पूरे मप्र की आबादी के लिहाज से हिसाब से देखा जाए तो करीब 2 करोड़ लोग हाईपरटेंशन की चपेट में हैं। इस हिसाब से करीब सवा दो करोड़ मरीज दिल की बीमारी या उससे कारकों से पीड़ित हैं। थोक दवा विक्रेताओं के अनुसार दवाएं 10 प्रतिशत तक महंगी हुई हैं। इस हिसाब से हर मरीज का मासिक 60 से 80 रुपए अतिरिक्त आया है।
प्रदेश में हर दिन 40 से ज्यादा एंजियोप्लास्टी का अनुमान
इधर मप्र में हार्ट मरीजों की बढ़ती संख्या की तस्दीक इंटरवेंशनल काउंसिल की 2018 की रजिस्ट्री भी करती है। इसके अनुसार, 2018 में देश में 4.38 लाख एंजियो प्लास्टी हुईं। देशभर की एंजियोप्लास्टी में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 2.52% थी। इस हिसाब से प्रदेश में करीब 11 हजार एंजियोप्लास्टी, यानी औसतन 30 प्रतिदिन हुईं। काउंसिल के हिसाब से हर साल इसमें 15 से 20 फीसदी का इजाफा हो रहा है। इस हिसाब से 2025 तक प्रदेश में सालाना 25 हजार से अधिक एंजियोप्लास्टी की गई होंगी। 2026 में ये आंकड़ा अनुमानित 26 हजार हो सकता है।
हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं ये पांच कारण
हाई बीपी: लगातार बढ़ा रक्तचाप दिल पर दबाव बढ़ाता है।
डायबिटीज: रक्त में शर्करा बढ़ने से हृदय और रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
स्मोकिंग: रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर हृदयाघात का जोखिम बढ़ाता है।
बढ़ा कोलेस्ट्रॉल: धमनियों में रुकावट बनने की आशंका बढ़ती है।
फिजिकल एक्टिविटी नहीं होना: नियमित गतिविधि की कमी हृदय रोग का जोखिम बढ़ाती है।
ब्लडप्रेशर कंट्रोल करने के लिए जांच और संतुलित जीवनशैली जरूरी
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. किसलय श्रीवास्तव ने बताया कि नियमित रक्तचाप जांच से इसके बढ़ने का समय रहते पता लगाया जा सकता है। नमक सीमित रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी हृदय स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। डॉक्टर की सलाह से दवा नियमित लें और बिना परामर्श खुराक बंद या कम न करें।
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दवाओं के नाम - पुरानी कीमत - नई कीमत
मेटफॉर्मिन - 8 से 40 रुपए - 15 से 60 रुपए
एट्रोवास्टिन - 40 से 350 रुपए - 45 से 700 रुपए तक
एस्पिरिन - 2 से 10 रुपए - 8 से 30 रुपए
एम्लोडिपिन - 10 से 50 रुपए -15 से 80 रुपए
लोसार्टन - 25 से 100 रुपए - 35 से 150 रुपए
(डिस्क्लेमर: ब्रांड और दवा के प्रकार के हिसाब से दाम घट-बढ़ सकते हैं।)
मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर दवा बाजार पर
दवा निर्माता विजय जैन का कहना है कि मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते सॉल्ट की सप्लाई प्रभावित हो या बीते कुछ सालों में बढ़ती महंगाई, सभी का असर दवा बाजार पर पड़ा है। दवाओं के दाम में 10 से लेकर 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे आम आदमी के दवा के मासिक बजट में 10 से 15 फीसदी की अंतर तो आया है।
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