एसिडिटी की दवा लेने से पहले डॉक्टर की पर्ची जरूरी? वोनोप्राजान पर CDSCO ने बदली शर्त

अगर आपको बार-बार एसिडिटी होती है और आप मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदकर खाते हैं, तो दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। CDSCO ने वोनोप्राजान 10 और 20 मिलीग्राम की बिक्री को डॉक्टर की पर्ची से जोड़ने की शर्त में बदलाव किया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एसिडिटी की हर दवा अब बिना पर्ची नहीं मिलेगी। यह शर्त खास तौर पर वोनोप्राजान से जुड़ी है। CDSCO की मार्च 2026 की सिफारिश में पहले “गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट” की पर्ची की शर्त को बदलकर Registered Medical Practitioner यानी पंजीकृत डॉक्टर की पर्ची करने की बात कही गई थी।
वोनोप्राजान क्यों चर्चा में है?
वोनोप्राजान का इस्तेमाल एसिड से जुड़ी पेट की बीमारियों के इलाज में किया जाता है। CDSCO के रिकॉर्ड के मुताबिक, 10 और 20 mg की वोनोप्राजान टैबलेट भारत में पहले से मंजूर है। अगस्त 2025 में CDSCO की विशेषज्ञ समिति ने इसके लिए रिटेल बिक्री को डॉक्टर की पर्ची से जोड़ने की शर्त रखी थी। बाद में मार्च 2026 में इस शर्त को संशोधित करते हुए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की जगह किसी Registered Medical Practitioner की पर्ची को मान्य करने की सिफारिश की गई।
लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेना क्यों जांच का विषय है?
अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बार-बार एसिडिटी होती है और उसे लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत पड़ रही है, तो सिर्फ दवा लेते रहने के बजाय समस्या की वजह पता करना जरूरी है। लंबे समय तक कुछ तरह की एसिड कम करने वाली दवाओं के इस्तेमाल से कुछ मरीजों में विटामिन B12 या मैग्नीशियम की कमी जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को ऐसी परेशानी होगी। इसलिए रोजाना या लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत पड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
फैटी लिवर की दवाओं पर भी रिसर्च
फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी के इलाज के लिए कई नई दवाओं पर क्लिनिकल ट्रायल और अध्ययन चल रहे हैं। इनमें रेसमेटिरोम जैसी दवाएं शामिल हैं। CDSCO के रिकॉर्ड में रेसमेटिरोम 60, 80 और 100 mg के लिए फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति दर्ज है। इन अध्ययनों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दवा संबंधित मरीजों में कितनी सुरक्षित और प्रभावी है। क्लिनिकल ट्रायल में शामिल दवा को सामान्य मरीजों के लिए अपने-आप शुरू करने की सलाह नहीं दी जाती।
कब्ज और पेट दर्द के इलाज पर भी काम
IBS-C यानी कब्ज के साथ इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के इलाज के लिए लिनाक्लोटाइड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलग-अलग डोज और उपयोग को लेकर भी क्लिनिकल रिसर्च चल रही है। ऐसी दवाओं को लेकर अंतिम इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और संबंधित नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करता है।
सिकल सेल बीमारी में बच्चों पर एटावोपिवाट का ट्रायल
सिकल सेल बीमारी के इलाज से जुड़ी एटावोपिवाट दवा पर भी क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं। CDSCO के रिकॉर्ड में एटावोपिवाट 200 mg के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति दर्ज है। बच्चों में किसी दवा की सुरक्षा और प्रभाव को अलग से जांचना जरूरी होता है। इसलिए किसी क्लिनिकल ट्रायल या अध्ययन में दवा शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि वह दवा सभी बच्चों के लिए सामान्य उपचार के तौर पर उपलब्ध या अनुशंसित हो गई है।
जरूरी बात: एसिडिटी बार-बार होती है तो खुद से लंबे समय तक दवा लेने के बजाय डॉक्टर से कारण और सही इलाज के बारे में सलाह लें।




















