मथुरा में वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा, बंदरों में टीबी की पुष्टि, इंसानों से जानवरों में फैल रहा संक्रमण

मथुरा में बंदरों को खाना खिलाना अब उनके लिए मुसीबत बनता जा रहा है! वैज्ञानिकों के शोध में बंदरों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई है। आशंका है कि टीबी से पीड़ित मरीजों के संपर्क में आए दूषित भोजन और फलों को खाने से बंदर भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इससे इंसानों और जानवरों, दोनों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शोध में सामने आई बंदरों में टीबी की मौजूदगी
भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वैज्ञानिकों ने मथुरा में 150 से ज्यादा संदिग्ध बंदरों के खून, थूक और फेफड़ों के नमूने लिए। इसके अलावा मृत बंदरों के पोस्टमॉर्टम के दौरान भी जांच की गई। शोध में कुछ नमूनों में टीबी फैलाने वाले माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह मामला रिवर्स जूनोसिस से जुड़ा हो सकता है। आमतौर पर जूनोसिस में बीमारी जानवरों से इंसानों तक पहुंचती है, जबकि रिवर्स जूनोसिस में संक्रमण इंसानों से जानवरों तक फैल सकता है। विशेषज्ञों को आशंका है कि टीबी से पीड़ित लोगों के संपर्क में आए दूषित भोजन को खाने से बंदर संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि, संक्रमण किस रास्ते से फैला, इसकी पुष्टि के लिए आगे की जांच जरूरी है।
खुले में फेंका खाना बन सकता है खतरा
मथुरा में धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में बंदरों को खाना खिलाने का चलन है। कई बार लोग बचा हुआ भोजन, फल या दूसरी चीजें खुले में छोड़ देते हैं। अगर इन चीजों पर संक्रमित व्यक्ति के खांसने या थूक के जरिए बैक्टीरिया पहुंचा हो, तो उन्हें खाने वाले बंदरों के संक्रमित होने की आशंका हो सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि संक्रमित बंदरों के करीब जाने या उन्हें हाथ से खाना खिलाने से इंसानों के लिए संक्रमण का खतरा बन सकता है। इसलिए बंदरों को छूने, उनके बहुत पास जाने और खुले में पड़ा दूषित भोजन खिलाने से बचने की सलाह दी गई है। किसी बंदर के बीमार या असामान्य व्यवहार करने पर उसे खुद पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि संबंधित विभाग को सूचना दें।
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मथुरा में टीबी के मरीजों के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मथुरा जिले में टीबी के दर्ज मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा है। वर्ष 2023 में 17,302 मामले दर्ज हुए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 18,106 हो गई, जबकि 2025 में घटकर 17,759 रही। वर्ष 2026 में 21 अगस्त तक 10,344 नए मरीज दर्ज किए गए। ये आंकड़े जिले में टीबी की रोकथाम और समय पर पहचान की जरूरत को रेखांकित करते हैं। हालांकि, इंसानों में दर्ज टीबी के मामलों और बंदरों में मिले संक्रमण के बीच सीधे संबंध को लेकर अलग से जांच जरूरी है।
बंदरों से इंसानों तक संक्रमण फैलने की आशंका
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बंदर टीबी से संक्रमित होते हैं, तो उनके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए भी जोखिम हो सकता है। खासकर बंदरों को हाथ से खाना खिलाने, उन्हें छूने या उनके बहुत करीब रहने से बचना चाहिए। बंदर के काटने या खरोंचने की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सलाह लें। विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि भूख या भोजन की तलाश में बंदर लोगों के करीब आ सकते हैं। ऐसे में उन्हें उकसाना, पकड़ने की कोशिश करना या उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पास जाना खतरनाक हो सकता है। लोगों को बंदरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उन्हें खाने की चीजें न देने की सलाह दी गई है।
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वैज्ञानिकों की टीम कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुवास मथुरा के वेटरनरी हॉस्पिटल, केजीएमयू और भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वैज्ञानिकों की टीम संवेदनशील इलाकों में नमूने जुटा रही है। इसका मकसद बंदरों में संक्रमण की स्थिति समझना और बीमारी के फैलाव को रोकने के उपाय तलाशना है। स्वास्थ्य विभाग भी टीबी के मामलों पर नजर रख रहा है। लोगों से अपील है कि वे बीमार व्यक्ति या बंदर के संपर्क में आने पर लापरवाही न करें और स्वास्थ्य संबंधी सलाह लें। साथ ही, खुले में भोजन फेंकने और बंदरों को खाना खिलाने से बचें, ताकि इंसानों और जानवरों—दोनों की सुरक्षा की जा सके।




















