इन आदतों से हो सकता है कैंसर, जान लें और आज ही बदलें अपनी लाइफस्टाइल

कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है। यानी दुनियाभर में होने वाली लगभग हर छठी मौत के पीछे कैंसर की भूमिका होती है। इसे दुनिया में मौत का दूसरा बड़ा कारण भी माना जाता है।
कैंसर अचानक नहीं होता
कैंसर एक दिन में विकसित नहीं होता। शरीर की कोशिकाओं में लंबे समय तक होने वाले छोटे-छोटे बदलाव धीरे-धीरे डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जब शरीर इन असामान्य कोशिकाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता, तो वे तेजी से बढ़ने लगती हैं और कैंसर विकसित हो सकता है। यही वजह है कि कुछ गलत आदतें कई सालों तक बिना किसी खास लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। अच्छी बात यह है कि जीवनशैली में कुछ बदलाव करके कई प्रकार के कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।
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1. तंबाकू से रहें दूर
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, तंबाकू कैंसर से होने वाली मौतों के सबसे बड़े रोके जा सकने वाले कारणों में से एक है। सिगरेट, बीड़ी और चबाने वाला तंबाकू सभी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। तंबाकू में कई ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है। इसके अलावा मुंह, गले, भोजन नली, मूत्राशय, अग्न्याशय, किडनी और पेट के कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
2. शराब का सेवन भी बढ़ा सकता है खतरा
कई लोग मानते हैं कि थोड़ी मात्रा में शराब पीने से कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के अनुसार, शराब का सेवन कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। शरीर में शराब टूटने के बाद एसीटैल्डिहाइड नाम का पदार्थ बनता है, जो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। शराब से मुंह, गले, भोजन नली, लिवर, स्तन और बड़ी आंत के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
3. बढ़ता वजन भी है चिंता की वजह
अधिक वजन सिर्फ डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ाता, बल्कि कई प्रकार के कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है। मोटापे के कारण शरीर में लंबे समय तक सूजन और हार्मोन से जुड़े बदलाव हो सकते हैं। ये बदलाव कुछ परिस्थितियों में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकते हैं। अधिक वजन का संबंध स्तन, बड़ी आंत, गर्भाशय की अंदरूनी परत, किडनी और लिवर समेत कई कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से पाया गया है।
4. खान-पान पर भी दें ध्यान
आपकी रोज की थाली भी कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकती है। खासकर प्रोसेस्ड मीट, ज्यादा नमक-चीनी और बहुत ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। आईएआरसी ने प्रोसेस्ड मीट को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन की श्रेणी में रखा है। इसके अधिक सेवन को कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। इसके अलावा बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और कई तरह के एडिटिव्स की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए खाने में ताजे और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।
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5. लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव
कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म करने का कोई एक तरीका नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से कई जोखिम कम किए जा सकते हैं। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, शराब से बचाव, वजन को नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। कैंसर के कई कारण हो सकते हैं और हर कैंसर केवल जीवनशैली की वजह से नहीं होता। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता या लक्षण के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।












