Hemant Nagle
4 Feb 2026
Garima Vishwakarma
4 Feb 2026
Naresh Bhagoria
4 Feb 2026
इंदौर। चर्चित ट्रांसपोर्टर राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। शिलांग पुलिस द्वारा सबूत नष्ट करने के संदेह में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को अब पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह खुलासा हुआ है कि जिन आधारों पर गिरफ्तारी की गई थी, वे जांच में टिक नहीं पाए।
दोनों को क्लीन चिट
मामले में गार्ड बलवीर अहिरवार और हीरानगर स्थित बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर को ईस्ट खासी हिल्स पुलिस ने संदेह के घेरे में लेते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस का तर्क था कि हत्या के बाद मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी जिस फ्लैट में ठहरी थी, वह फ्लैट लोकेंद्र की बिल्डिंग में स्थित था। यह फ्लैट ब्रोकर शिलोम जेम्स के माध्यम से किराए पर लिया गया था और किराया अनुबंध किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर किया गया था। इसी कड़ी को आधार बनाकर दोनों पर सबूत मिटाने में मदद करने का शक जताया गया था। घटनाक्रम के विस्तृत सत्यापन के बाद जांच में न तो हत्या में उनकी कोई भूमिका सामने आई और न ही सबूत नष्ट करने के आरोपों की पुष्टि हो सकी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को क्लीन चिट देते हुए रिहा कर दिया।
चार्जशीट पेश
पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट पेश कर दी है, जिसमें मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी, राज कुशवाह सहित अन्य नामजद आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। इस घटनाक्रम के बाद शिलांग पुलिस की शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या निर्दोषों को जल्दबाजी में आरोपी बना दिया गया? और क्या वास्तविक कड़ियों तक पहुंचने से पहले ही जांच अनुमान के आधार पर आगे बढ़ा दी गई? राजा रघुवंशी हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता की भी कसौटी बनता जा रहा है।