जीएसटी कटौती ने बदली टू ह्वीलर मार्केट की रणनीति, कंपनियों ने 300-350cc बाइक्स पर बढ़ाया फोकस

नई दिल्ली। हाल ही में दोपहिया वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में की गई कटौती ने ऑटोमोबाइल उद्योग की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। सरकार ने 350cc तक की इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर जीएसटी दर 28% से घटाकर 18% कर दी है, जिससे इस श्रेणी के वाहनों की मांग बढ़ने की संभावना है। वहीं 350cc से ऊपर की बाइक्स पर अब 40% टैक्स लागू होगा, जिसे लक्जरी सेगमेंट के अंतर्गत रखा गया है। यही कारण है कि देश की बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनियां अब 350cc तक के इंजन वाली बाइक्स पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रही हैं। हीरो मोटोकॉर्प, रॉयल एनफील्ड, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया और बजाज ऑटो जैसी अग्रणी कंपनियां अब इस सब-350cc श्रेणी में नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह श्रेणी अब परफॉर्मेंस और टैक्सेशन दोनों के लिहाज से सबसे आकर्षक हो गई है।
टैक्स स्लैब बदलाव से बिक्री में सुधार की उम्मीद
पहले जहां कंपनियां उच्च क्षमता वाली बाइक्स को प्रीमियम बाजार में बेचकर मुनाफा कमाती थीं, अब जीएसटी दरों में बदलाव के बाद फोकस 300-350cc इंजन वाली मोटरसाइकिलों पर शिफ्ट हो गया है। बजाज ऑटो के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर राकेश शर्मा ने कहा कि 350cc से कम क्षमता वाले वाहनों को इस बदलाव से सबसे अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया उद्योग ने पहले ही यह टैक्स लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचा दिया है, जिससे बिक्री में सुधार की उम्मीद है। वहीं होंडा मोटरसाइकिल ने भी बताया कि उनके 350cc मॉडल को ग्राहकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और कंपनी अब इस श्रेणी में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए नए मॉडल और नेटवर्क विस्तार की योजना बना रही है। हीरो मोटोकॉर्प और बजाज ऑटो दोनों ने वर्ष 2026 की शुरुआत तक 300-350cc के बीच नई बाइक्स लॉन्च करने की पुष्टि की है।
बेहतर परफार्मेंस पर जोर दे रहीं कंपनियां
रॉयल एनफील्ड, जो पहले से ही इस श्रेणी की अग्रणी कंपनी है, अब अपने नए इंजन और पावरट्रेन को इस तरह से डिजाइन कर रही है कि उसकी बाइक्स 350cc की सीमा के भीतर रहें लेकिन प्रदर्शन में कोई कमी न आए। इस बदलाव के कारण कंपनियां अब केवल कीमत पर नहीं बल्कि इंजीनियरिंग सुधारों पर भी जोर दे रही हैं। उनका लक्ष्य है कि छोटे इंजन से भी अधिक टॉर्क, बेहतर परफॉर्मेंस और स्मूथ राइडिंग अनुभव प्रदान किया जाए। इसके लिए कंपनियां नई ईंधन मैपिंग तकनीक, हल्के मेटल कंपोनेंट्स और बेहतर दहन नियंत्रण पर काम कर रही हैं। इसे उद्योग विशेषज्ञ डाउनसाइजिंग नहीं बल्कि नई परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड की ओर कदम बताते हैं। अब 350cc श्रेणी की बाइक्स में वे सभी फीचर्स जो पहले महंगी बाइक्स में मिलते थे, शामिल किए जा रहे हैं जैसे डिजिटल डैशबोर्ड, ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और राइडिंग मोड्स।
प्रीमियम श्रेणी में बदल रहा मिड-रेंज सेगमेंट
इस तरह कंपनियां मिड-रेंज सेगमेंट को प्रीमियम अनुभव देने वाली श्रेणी में बदल रही हैं। दूसरी ओर, 400cc से 650cc तक की बाइक्स की मांग में गिरावट देखने को मिल रही है, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में। नए टैक्स स्ट्रक्चर के कारण इन बाइक्स की कीमतें ₹25,000 से ₹60,000 तक बढ़ गई हैं, जिससे ये आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर जा रही हैं। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीमियम बाइक सेगमेंट पूरी तरह समाप्त नहीं होगा, लेकिन उसकी वृद्धि की रफ्तार अब धीमी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, जीएसटी में कटौती ने भारतीय दोपहिया उद्योग के केंद्र को शक्ति से स्मार्ट परफॉर्मेंस की ओर मोड़ दिया है। अब 350cc न केवल टैक्स के लिहाज से फायदेमंद श्रेणी बन गई है, बल्कि यह नए युग के आकांक्षी बाइकर्स की पहली पसंद भी बनने जा रही है।












