बड़े गहनों पर ब्रेक और छोटे बने हीरो, माइक्रो-गोल्ड की बिक्री तीन गुना बढ़ी

सोने चांदी की महंगाई के बीच माइक्रो-गोल्ड में निवेश का ट्रेंड बढ़ रहा है।1 से 2 ग्राम वाले माइक्रो-गोल्ड आइटम तेजी से लोकप्रिय हुए हैं।
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बड़े गहनों पर ब्रेक और छोटे बने हीरो, माइक्रो-गोल्ड की बिक्री तीन गुना बढ़ी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अखिल सोनी, इंदौर

    देश में बढ़ती महंगाई और आय-अनिश्चितता के बीच सोना-चांदी खरीद में नया ट्रेंड उभर आया है। बड़े आभूषणों की मांग लगभग स्थिर है, लेकिन 1 से 2 ग्राम वाले माइक्रो-गोल्ड आइटम तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। पिछले चार वर्षों में इनकी हिस्सेदारी 12% से बढ़कर 36% तक पहुंच गई। यह बढ़त शहरों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में और तेज दिखी है। इसी तरह चांदी में भी 50-100 ग्राम श्रेणी वाली वस्तुओं की बिक्री 28% बढ़ी। बाजार विशेषज्ञ इसे कम बजट में सुरक्षित निवेश की मजबूती से जोड़ रहे हैं।

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    ज्वेलर्स बदल रहे रणनीति 

    इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर के अलावा प्रदेश के छोटे बड़े ज्वेलर्स ने ‘1 ग्राम जोन’ बनाना शुरू कर दिया है। कुछ ब्रांडों के अनुसार, माइक्रो-गोल्ड से आने वाला रेवेन्यू अब कुल बिक्री का 18-22% तक पहुंच चुका है। जो पांच साल पहले सिर्फ 8% था।

    इसलिए बढ़ी छोटे सामानों की मांग

    • गांव को लोग कैश के बजाए सोना रखना ज्यादा बेहतर मानते हैं।
    • जब जरुरत हो तो किसी भी वक्त इसे कैश में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • माइक्रो-गोल्ड का लिक्विडेशन 15 मिनट के भीतर हो जाता है।
    • भारी आभूषण बेचने में मोलभाव और समय दोनों अधिक लगते हैं। 

    ये हैं बदलाव के मुख्य कारण

    • 2020-21 : महामारी के दौरान बड़े गहनों की मांग घटी, छोटे ‘इमरजेंसी गोल्ड’ की खरीदी बढ़ी।
    • 2021-22 : आर्थिक अनिश्चितता और बचत प्रवृत्ति से माइक्रो-गोल्ड का दायरा बढ़ा।
    • 2022-23 : महंगाई बढ़ने पर छोटे निवेश (1-2 ग्राम) को लोग सुरक्षित विकल्प मानने लगे।
    • 2023-24 : ज्वेलर्स ने ‘1 ग्राम जोन’ और छोटे आइटम्स पर स्टॉक बढ़ाया, जिससे मांग और तेज हुई।

    आगे का ट्रेंड ऐसा होगा 

    विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत 2027 तक दुनिया का सबसे बड़ा माइक्रो-गोल्ड बाजार बन सकता है, यह बदलाव बताता है कि सोना-चांदी अब सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि जनता का नया बचत उपकरण बन रहा है।

    गांवों में निवेश बढ़ रहा है

    सराफा ऐसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी कहते हैं कि शहर की अपेक्षा गांव में निवेश बढ़ा है। ग्रामीण आज से नहीं सालों से सोना-चांदी खरीदते आ रहे हैं। उनकी सोच रहती है कि मुसीबत में काम आता है। अब ट्रेंड बदल रहा है, 50-100 ग्राम की जगह 1 से 5 ग्राम तक ही ले रहे हैं।               

    अब 1 से 3 ग्राम सोना ही लेता हूं

    सोनकच्छ के किसान मलखान पटेल ने कहा कि मैं छोटा किसान हूं, ढाई एकड़ जमीन है, पहले सोना सस्ता था तो दो-चार तोला खरीद लेता था, ताकि शादी या मुसीबत में काम आए। जब से कीमतें बढ़ी हैं फसल का पैसा आते ही कभी 1 तो कभी 3 ग्राम सोना ही ले लेता हूं।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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