वाशिंगटन डीसी । अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दिसंबर की बैठक में लगातार तीसरी बार 0.25% या 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए नीतिगत दर को 3.5%–3.75% के दायरे में ला दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है जब महंगाई एक बार फिर ऊपर बढ़ रही है और फेड ने मान लिया है कि मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी हुई है। इसके बावजूद कटौती का निर्णय लिया गया, जिससे साफ हो जाता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में छाई कमजोरी और रोजगार बाजार की सुस्ती फेड के लिए ज्यादा बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं। इस निर्णय ने फेड के भीतर भी गंभीर मतभेद उजागर कर दिए हैं।
कंसास सिटी फेड के अध्यक्ष जेफ श्मिड और शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने इस कदम का विरोध किया और दरों को अपरिवर्तित रखने की वकालत की। उनके अनुसार, महंगाई अभी भी पर्याप्त रूप से ऊंची है और आगे की कटौती करना जल्दबाजी होगी। दूसरी ओर, फेड गवर्नर स्टीफन मिरान ने आधे प्रतिशत (50 बेसिस प्वाइंट) की बड़ी कटौती की मांग की, ताकि कमजोर पड़ते रोजगार बाजार को मजबूत सहारा दिया जा सके। एक ही बैठक में तीन अलग-अलग दृष्टिकोण होने से यह स्पष्ट है कि फेड में नीति की दिशा को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।
फेड के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि सरकारी शटडाउन की वजह से कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। नौकरी वृद्धि, महंगाई और उपभोक्ता गतिविधियों से जुड़े कुछ प्रमुख डेटा एकत्र ही नहीं किए जा सके, जिससे नीति निर्धारण और कठिन हो गया। फेड ने पहले ही संकेत दे दिया था कि डेटा की कमी दिसंबर के निर्णय को प्रभावित कर सकती है, और आज का फैसला उसी अनिश्चित माहौल का परिणाम है। फेड के बयान के अनुसार, आर्थिक गतिविधि मध्यम गति से बढ़ रही है, लेकिन रोजगार वृद्धि इस वर्ष काफी धीमी रही है। बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। महंगाई भी पिछले महीनों में बढ़ी है और लक्ष्य से ऊपर है।
यानी अर्थव्यवस्था दोहरे दबाव में है-रोजगार बाजार कमजोर है। महंगाई उच्च स्तर पर है। ऐसे में फेड का निर्णय यह दिखाता है कि वह रोजगार को प्राथमिकता दे रहा है, भले ही महंगाई अभी पूरी तरह काबू में न आई हो। पिछली बैठक से लेकर अब तक अधिकारियों के बीच इस बात पर तीखी बहस हुई कि आगे और कितनी कटौती की जाए। कुछ सदस्य श्रम बाजार को सहारा देने के लिए अधिक कटौती के पक्ष में थे, जबकि अन्य महंगाई को देखते हुए रोक लगाने के समर्थन करते दिखाई दिए। इसी उथल-पुथल के कारण बाजार में भी दिसंबर की कटौती को लेकर संभावनाएं लगातार बदलती रहीं।
फेड के इस फैसले के पीछे राजनीतिक दबाव की छाया भी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बार-बार चेयर जेरोम पॉवेल की आलोचना करते रहे हैं कि उन्होंने तेजी से दरें नहीं घटाईं। डोनाल्ड ट्रम्प ने तो यह भी कहा कि फेड को दरों को 2% से नीचे लाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने संकेत दिया है कि अगले वर्ष की शुरुआत में फेड का नया चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा। यह स्थिति फेड की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है। कुल मिलाकर, यह दर कटौती अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गहराती चुनौतियों, डेटा की कमी और राजनीतिक दबावों के बीच किया गया एक जटिल निर्णय है। इसका असर वैश्विक बाजारों, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और मुद्रा विनिमय दरों पर आने वाले दिनों में दिखाई देगा।