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मुंबई। देश के आईटी सेक्टर में इन दिनों एक दिलचस्प रुझान देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां विदेशी निवेशक (एफआईआई) लगातार आईटी शेयरों से दूरी बना रहे हैं, वहीं घरेलू म्यूचुअल फंड्स इन्हीं शेयरों में जोरदार खरीदारी कर रहे हैं। सितंबर तिमाही में एफआईआई ने इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज आईटी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जबकि भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने उन्हीं कंपनियों में निवेश बढ़ाया है। यह विरोधाभासी रुख अब बाजार में एक बड़े सवाल को जन्म दे रहा है आखिर विजेता कौन होगा?
आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने टॉप 10 में से 8 आईटी शेयरों में हिस्सेदारी घटाई। उदाहरण के तौर पर, इंफोसिस में विदेशी निवेशक 1.84 प्रतिशत गिरावट के साथ 30.08% हिस्सेदारी पर आ गए हैं, जबकि घरेलू फंड्स का योगदान लगभग उतनी ही बढ़ोतरी के साथ 22.73% के स्तर तक पहुंच गया। टीसीएस में भी यही पैटर्न रहा एफआईआई की हिस्सेदारी घटी, जबकि म्यूचुअल फंड्स ने खरीदी बढ़ाई। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और कोफोर्ज जैसी मिडकैप आईटी कंपनियों में तो यह अंतर और भी ज्यादा रहा, जहां विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर निकासी की और घरेलू फंड्स ने मौके का फायदा उठाया।
यह खरीदारी ऐसे समय हो रही है जब आईटी शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस साल अब तक एचसीएल टेक, इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयर 20% से अधिक टूट चुके हैं। टीसीएस अपने उच्चतम स्तर से लगभग 33% नीचे है। वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग, एआई के बढ़ते प्रभाव और आय में सुस्ती ने इस सेक्टर को दबाव में रखा है। ब्रोकरेज हाउस जेफरीज का मानना है कि आने वाले सालों में एआई आईटी सेवाओं की आय में 20% तक गिरावट ला सकता है।
उनका अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच आईटी कंपनियों की ग्रोथ सिर्फ 3.8% सीएजीआर तक सिमट सकती है। ग्राहकों में यह आशंका बनी हुई है कि एआई की तेज प्रगति उनके मौजूदा तकनीकी निवेशों को अप्रासंगिक बना सकती है, इसलिए वे नए प्रोजेक्ट्स टाल रहे हैं। इसके साथ ही, महामारी के बाद 2021 से 2024 के बीच हुई भारी टेक्नोलॉजी खर्च का पूरा लाभ भी कंपनियों को अभी तक नहीं मिला है।
दूसरी ओर, घरेलू फंड मैनेजर इस पूरे परिदृश्य को अवसर के रूप में देख रहे हैं। डीएसपी म्यूचुअल फंड के रणनीतिकार पार्थ शाह का कहना है कि भारतीय आईटी शेयर भले ही सस्ते न हों, लेकिन बाकी बाजार की तुलना में वे “वैल्यू” प्रदान कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह सेक्टर स्थिर आय देने वाला है और इसके डिविडेंड यील्ड (3.2%) भी निफ्टी 50 के मुकाबले दोगुनी है, जिससे निवेशकों को डाउनसाइड से कुछ सुरक्षा मिलती है। शाह का तर्क है कि अगर आईटी शेयरों में और 10–15% की गिरावट आती है, तो यह एक एब्सोल्यूट बार्गेन साबित हो सकता है। फिलहाल भी यह क्षेत्र रिलेटिव वैल्यू की स्थिति में है यानी बाकी महंगे शेयरों की तुलना में ये अधिक आकर्षक विकल्प हैं। कुल मिलाकर, जहां विदेशी निवेशक एआई और वैश्विक मंदी के डर से आईटी सेक्टर से दूरी बना रहे हैं, वहीं भारतीय म्यूचुअल फंड्स इन शेयरों को सस्ते मूल्य को लंबी अवधि के अवसर के रूप में देख रहे हैं।