दिल्ली हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को कैश फॉर क्वेरी मामले में राहत दी है। कोर्ट ने लोकपाल के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सीबीआई को महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की अनुमति दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच (जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर) ने लोकपाल को महुआ की दलीलों पर एक महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया। लोकपाल ने पहले सीबीआई को महुआ के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने की मंजूरी दी थी।
महुआ मोइत्रा ने लोकपाल के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील ने कोर्ट में दलील दी कि लोकपाल ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और सीबीआई को चार्जशीट दायर करने की मंजूरी दी।
महुआ के वकील का कहना था कि यह फैसला लोकपाल अधिनियम और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान महुआ के वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता ने कोर्ट से सीबीआई की कार्रवाई पर अंतरिम रोक की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने तुरंत अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
16 दिसंबर को नेशनल हेराल्ड केस में विशेष अदालत ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। उस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए सरकार पर हमला किया।
अब महुआ मोइत्रा को मिली राहत के साथ विपक्ष को सरकार के खिलाफ आक्रामक होने का दूसरा मौका मिल गया है।