IQ से ज्यादा जरूरी EQ!अचानक सवाल आए तो घबराएं नहीं, इमोशनल इंटेलिजेंस अपनाएं

जब अचानक कोई सवाल सामने आ जाता है, तो कई बार हम घबरा जाते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, दिमाग में उथल-पुथल मच जाती है और हम बिना सोचे-समझे जवाब दे देते हैं। बाद में लगता है काश थोड़ा रुककर जवाब दिया होता। ऐसे ही मौकों पर इमोशनल इंटेलिजेंस हमारी मदद करता है। अगर हम कुछ सेकंड का पॉज लें, अपनी भावनाओं को समझें और फिर शांति से जवाब दें, तो यही इमोशनल इंटेलिजेंस का सही इस्तेमाल होता है।
इमोशनल इंटेलिजेंस क्या है?
इमोशनल इंटेलिजेंस (Emotional Intelligence), जिसे EI या EQ भी कहा जाता है, अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझने, संभालने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता है। इसका मतलब सिर्फ अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना नहीं है, बल्कि सामने वाले की भावनाओं को पहचानना, उन्हें समझना और उसी हिसाब से प्रतिक्रिया देना भी है।
कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिंदगी में सफल होने के लिए सिर्फ IQ काफी नहीं होता, EQ यानी इमोशनल इंटेलिजेंस भी उतना ही जरूरी है। रिश्ते हों, करियर हो या मुश्किल हालात हर जगह EQ हमारी राह आसान बनाता है।
हाल ही में एक मेंटल हेल्थ केयरिस्ट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वो एक एक्ट्रेस से उनके भाई को लेकर सवाल पूछा जाता है। सवाल थोड़ा पर्सनल था। शहनाज तुरंत जवाब देने के बजाय पहले रुकती हैं, फिर सामने वाले से पूछती हैं, आपको क्या लगता है? इसके बाद वह बहुत ही शांत और सहज तरीके से अपनी बात रखती हैं। यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे मुश्किल सवालों में भी इमोशनल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
जब हम कोई चुभता हुआ सवाल सुनते हैं, तो हमारा दिमाग तुरंत खुद को बचाने की कोशिश करता है। इस घबराहट में हम कई बार ऐसा बोल जाते हैं, जिसका बाद में पछतावा होता है।
इससे बेहतर तरीका है सवाल सुनने के बाद थोड़ा रुकना। आप सामने वाले से सवाल भी कर सकते हैं, जैसे आपने ऐसा क्यों पूछा? या आप इस बारे में क्या सोचते हैं? इससे आपको सोचने का समय मिलता है और आप संतुलित जवाब दे पाते हैं।
इमोशनल इंटेलिजेंस कैसे बढ़ाएं?
- 1. सामने वाले को ध्यान से सुनें- अगर आप दूसरों की भावनाओं को समझना चाहते हैं, तो पहले उन्हें ध्यान से सुनना सीखें। सिर्फ शब्दों पर नहीं, उनकी आवाज के उतार-चढ़ाव, चेहरे के हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज पर भी ध्यान दें। कई बार बिना बोले भी बहुत कुछ कहा जाता है।
- 2. हमदर्दी दिखाएं- सिर्फ समझना ही काफी नहीं, सामने वाले की जगह खुद को रखकर देखना भी ज़रूरी है। सोचिए, अगर आप उनकी स्थिति में होते तो कैसा महसूस करते? इससे रिश्तों में गहराई आती है और आप ज्यादा संवेदनशील बनते हैं।
- 3. अपनी भावनाओं को पहचानें- दिनभर में कई बार हम अलग-अलग भावनाएं महसूस करते हैं गुस्सा, खुशी, डर या उदासी। यह समझना ज़रूरी है कि ये भावनाएं आपके फैसलों को कैसे प्रभावित कर रही हैं। जब आप अपनी भावनाओं को पहचानना सीख लेते हैं, तो उन पर कंट्रोल करना आसान हो जाता है।
- 4. सोच-समझकर प्रतिक्रिया दें- हर भावना पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी नहीं। थोड़ा रुकें, सोचें और फिर जवाब दें। खुद से सवाल पूछे क्या मैं सही वजह से ऐसा महसूस कर रहा हूं? क्या सामने वाले की कोई मजबूरी हो सकती है?
- 5. अभ्यास करते रहें- इमोशनल इंटेलिजेंस कोई एक दिन में सीखने वाली चीज नहीं है। यह धीरे-धीरे अभ्यास से बढ़ती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी स्थितियों में इसका इस्तेमाल करें।











