आज की तेज-तर्रार और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग खुद को भी अकेला और थका हुआ महसूस करते हैं। इसलिए इस पेंगुइन को भी वे अपनी भावनाओं से जोड़ रहे हैं। लोग इसे बर्नआउट, मानसिक थकान, रूटीन से बाहर निकलने की चाह और अकेलेपन का प्रतीक मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो इतना वायरल है कि कुछ ही समय में इस पर कई मीम्स भी बन गए। लेकिन यह नया नहीं है। यह क्लिप 2007 की डॉक्यूमेंट्री से ली गई है। 19 साल पुराना यह फुटेज 2026 में फिर से चर्चा में आ गया।
वीडियो में पेंगुइन अकेले चल रहा है, कभी दौड़ता है, कभी गिरता है, लेकिन फिर भी रुकता नहीं है। उसकी चाल इतनी धीमी और शांत लगती है कि लोग इसे निहिलिस्ट पेंगुइन कहने लगे। लोग इसे ऐसे देख रहे हैं जैसे पेंगुइन ने जिंदगी के मायने ही छोड़ दिए हों।
इस नाम का कारण यह है कि पेंगुइन की चाल और तरीके में एक तरह का फिलॉसॉफिकल असर दिखता है। जैसे वह खुद में खो गया हो और सब कुछ छोड़कर कहीं जा रहा हो। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह केवल एक भावनात्मक कहानी नहीं है।
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेंगुइनों में कभी-कभी ऐसा व्यवहार देखने को मिलता है। कई बार इसके पीछे स्वास्थ्य या न्यूरोलॉजिकल समस्या हो सकती है। यानी यह पेंगुइन मानसिक रूप से टूटकर नहीं चल रहा, बल्कि उसकी सेहत खराब होने की वजह से वह झुंड से अलग हो गया होगा।
कुछ पेंगुइन बीमार होने पर रास्ता भटक जाते हैं या अकेले चलने लगते हैं। इसलिए इसे निराश पेंगुइन कहना सही नहीं है। यह केवल एक पेंगुइन का असामान्य व्यवहार है, जो कभी-कभी जीव-जंतुओं में भी देखने को मिलता है।