शुक्रवार को देशभर में बसंत पंचमी धूमधाम से मनाई जा रही है। यह पावन पर्व ऋतुराज बसंत के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है। जैसे ही बसंत आता है, खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं और प्रकृति खुशी से भर जाती है। सनातन परंपरा में बसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है। यह पर्व केवल विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि रति और कामदेव की उपासना से भी जुड़ा हुआ है। ब्रजमंडल में इसे मदनोत्सव के नाम से मनाया जाता है, जो प्रेम, सौंदर्य और सृजन का उत्सव है।
पीले रंग का क्या है महत्व
बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पूजा में पीले फूल, फल और मिष्ठान्न अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। यही कारण है कि उनके उपासक इस दिन पीले रंग का प्रयोग वस्त्र, तिलक, पुष्प और भोग में करते हैं। पीला रंग ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
ज्ञान- समृद्धि का प्रतीक
सनातन संस्कृति में पीले रंग को शुभता और समृद्धि से जोड़ा गया है। इसका संबंध केवल मां सरस्वती से ही नहीं, बल्कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी से भी है। लक्ष्मी-नारायण दोनों को ही यह रंग विशेष रूप से प्रिय है। इसी कारण भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के व्रत और पूजन में पीले रंग से जुड़ी वस्तुओं का अधिक प्रयोग किया जाता है।
बसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव है, बल्कि यह ज्ञान, सौंदर्य, प्रेम और समृद्धि का संदेश भी देती है—एक ऐसा पर्व जो जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।
सरस्वती मां का है प्रिय रंग
ऐसा माना जाता है कि विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसी कारण वसंत पंचमी पर इस रंग का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में पीला रंग शुद्धता, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि इस पर्व पर पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं, जो आत्मशुद्धि और जीवन में सुख-समृद्धि के आगमन का संकेत माने जाते हैं। इस दिन लोग पीली वस्तुओं का दान करते हैं और देवी मां को भी पीले रंग से बने भोग अर्पित करते हैं।
प्रकृति में नए आगमन का देता है संकेत
वसंत पंचमी का समय प्रकृति में हो रहे बदलाव का संदेश देता है। कड़ाके की ठंड के बाद जब सूर्य देव उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं, तो उनकी सुनहरी किरणें धरती को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस ऋतु में खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है। दूर-दूर तक फैले पीले फूल पूरी धरती को मानो सुनहरी चादर से ढक देते हैं। प्रकृति के इस अनुपम सौंदर्य के साथ स्वयं को जोड़ने और ऋतु परिवर्तन का स्वागत करने के लिए लोग पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं।
खुशहाली- आशा का करता है संचार
मनोविज्ञान के अनुसार, पीला रंग मस्तिष्क को सक्रिय करता है और मन में खुशी, उत्साह तथा आत्मविश्वास का संचार करता है। यह रंग सूर्य के प्रकाश के सबसे निकट माना जाता है, जो ऊर्जा, आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है। अपने जीवन में भी इसी तरह की खुशहाली और सकारात्मकता की कामना के साथ लोग वसंत पंचमी के दिन पीला रंग अपनाते हैं।
शुभता और सौभाग्य का संकेत
भारतीय संस्कृति में पीले रंग को अत्यंत शुभ माना गया है। इसे सौभाग्य और मंगल का रंग कहा जाता है। विवाह हो या कोई नया शुभ कार्य, पीले रंग की उपस्थिति को आवश्यक माना जाता है। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनना और पीली चीजों का प्रयोग करना आने वाले पूरे वर्ष के लिए समृद्धि, सुख और खुशहाली की कामना का प्रतीक है।