Aakash Waghmare
25 Jan 2026
शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं होती, बल्कि दो परिवारों, दो सोचों और दो अलग-अलग जिंदगी के रास्तों का एक साथ जुड़ना होता है। शादी की तैयारियों में अक्सर लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि रिश्ते की असल नींव पर ध्यान देना भूल जाते हैं। खूबसूरत कपड़े, भव्य शादी, रस्मों के बीच कई महत्वपूर्ण बातें अनकही रह जाती हैं, जो आगे चलकर रिश्ते में दरारें पैदा कर सकती हैं।
कई बार शादी के कुछ महीनों बाद ही यह एहसास होता है कि काश ये बातें पहले ही साफ कर ली होतीं। इसलिए चाहे लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज, शादी से पहले खुलकर बात करना बहुत जरूरी है। खासकर आर्थिक स्थिति, भविष्य की योजनाएं, परिवार की उम्मीदें, करियर, बच्चे और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर पहले से स्पष्टता हो तो रिश्ते में स्थिरता और समझ बनी रहती है।
1. जीवन के लक्ष्य एक जैसे हैं या नहीं
शादी से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि आप दोनों जीवन में क्या चाहते हैं। क्या आप करियर को प्राथमिकता देंगे? बच्चों को लेकर आपकी सोच एक जैसी है या अलग? भविष्य में कहां रहना चाहते हैं- अपने शहर में या किसी और जगह? अगर दोनों के सपने और लक्ष्य बहुत अलग होंगे, तो आगे चलकर समझौते करना मुश्किल हो सकता है।
2. एक-दूसरे के विचारों का सम्मान
अच्छा रिश्ता वही होता है जहां दोनों एक-दूसरे की भावनाओं और फैसलों का सम्मान करते हों। अगर शादी से पहले ही किसी की बात को नजरअंदाज किया जा रहा है या उसकी आजादी पर सवाल उठ रहे हैं, तो यह एक चेतावनी हो सकती है।
3. सैलरी और खर्चों को लेकर साफ बातें
आजकल ज्यादातर कपल्स कामकाजी होते हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपकी और आपके पार्टनर की सैलरी कितनी है? हर महीने खर्चे कितने होते हैं? बचत की आदत कैसी है? अगर शुरुआत में ही सैलरी बढ़ा-चढ़ाकर बताई जाए या खर्च छुपाए जाएं, तो भरोसा कमजोर हो सकता है।
4. लोन और कर्ज की सच्चाई
अगर किसी पर एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन या होम लोन है, तो शादी से पहले यह बात साफ़ बतानी चाहिए। कई बार EMI छोटी लगती है, लेकिन हर महीने उसे देना आसान नहीं होता। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि परिवार पर कोई बड़ा कर्ज है या नहीं। शादी के बाद नई आर्थिक जिम्मेदारियों को कैसे संभालना है, यह पहले से तय करना बेहतर होता है।
5. परिवार और रिश्तेदारों को आर्थिक मदद
शादी के बाद कई बार परिवार या रिश्तेदारों को आर्थिक मदद करनी पड़ती है। अगर पहले से यह तय नहीं होगा कि मदद करनी है या नहीं, और कितनी मदद करनी है, तो बाद में झगड़ा हो सकता है। इसलिए इस पर खुलकर चर्चा करना जरूरी है।
6. पर्सनल सेविंग्स की अपनी जगह
विश्वास जरूरी है, लेकिन हर बात तुरंत बताना जरूरी नहीं। किसी की निजी बचत और भविष्य की योजना उसकी अपनी हो सकती है। जैसे-जैसे रिश्ता मजबूत होता है, वैसे-वैसे इन बातों पर खुलकर चर्चा की जा सकती है। यह जरूरी है कि दोनों समझें पर्सनल सेविंग्स पर व्यक्ति का अधिकार रहेगा और हर पैसे का हिसाब देना जरूरी नहीं है।
7. स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी
अगर किसी को कोई पुरानी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य जरूरत है, तो इसे छुपाने की बजाय पहले बता देना बेहतर होता है। इससे भविष्य में किसी भी मुश्किल समय में साथ मिलकर सही फैसले लिए जा सकते हैं।
8. लाइफस्टाइल में तालमेल
खान-पान, घूमना-फिरना, सोशल लाइफ, दिनचर्या इन सब में अगर बहुत फर्क होगा, तो आगे चलकर एडजस्टमेंट मुश्किल हो सकता है। शादी से पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों की लाइफस्टाइल कितनी मिलती-जुलती है।