फिल्मी हीरो से दिल लगा बैठी दुनिया!क्यों युवा चुन रहे हैं फिक्टोसेक्सुअलिटी लव

फिल्म देखते वक्त या कोई नॉवेल पढ़ते हुए कभी न कभी हम सबका दिल किसी हीरो या किरदार पर आ ही जाता है। किसी को फिल्म का हीरो पसंद आ जाता है, तो किसी को किताब का कोई हैंडसम या स्ट्रॉन्ग कैरेक्टर। आमतौर पर इसे हम एक क्रश मानकर भूल जाते हैं। लेकिन अगर यह पसंद सिर्फ पसंद न रहकर गहरे प्यार और यौन आकर्षण में बदल जाए, तो इसे फिक्टोसेक्सुअलिटी (Fictosexuality) कहा जाता है।
क्या होती है फिक्टोसेक्सुअलिटी?
फिक्टोसेक्सुअलिटी एक ऐसी यौन पहचान है, जिसमें व्यक्ति असली इंसानों के बजाय काल्पनिक किरदारों की ओर ज्यादा भावनात्मक और यौन आकर्षण महसूस करता है। ये किरदार किताबों, फिल्मों, टीवी सीरियल्स, एनीमे या वीडियो गेम्स के हो सकते हैं। ऐसे लोग इन किरदारों के साथ खुद को भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। कुछ लोग इन्हें अपना पार्टनर भी मानने लगते हैं।
तेजी से क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में फिक्टोसेक्सुअलिटी को महसूस करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि आज के दौर में रिश्तों की सोच बदल रही है। अब लोग चाहते हैं कि रिश्तों की टाइमिंग, उनकी रफ्तार और उनका भविष्य उनके अपने कंट्रोल में हो। यही आज के रिश्तों की नई परिभाषा बनती जा रही है।
क्यों आकर्षित हो रहे हैं?
1. धोखे और रिजेक्शन का डर नहीं
असल रिश्तों में सबसे बड़ा डर होता है धोखा, झूठ और रिजेक्शन। काल्पनिक रिश्तों में यह डर नहीं होता। जापान के अकिहिको कोंडो ने 2018 में एक होलोग्राफिक सिंगर से शादी की थी। उनका कहना है कि उनकी पार्टनर उन्हें कभी धोखा नहीं देगी, न बीमार पड़ेगी और न ही उन्हें छोड़कर जाएगी।
2. रिश्ते पर पूरा कंट्रोल-
फिक्टोसेक्सुअल रिश्तों में व्यक्ति तय करता है कि रिश्ता कब शुरू होगा, कितना गहरा होगा और कब खत्म होगा। यहां कोई दबाव नहीं, कोई मजबूरी नहीं। असल रिश्तों में जहां समझौते करने पड़ते हैं, वहीं यहां सब कुछ व्यक्ति की सुविधा के अनुसार चलता है।
3. टेक्नोलॉजी का असर-
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI चैटबॉट्स ने इस ट्रेंड को और बढ़ा दिया है। आज कई लोग AI गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड से बात करते हैं, अपनी भावनाएं शेयर करते हैं और उन्हें अपना साथी मानने लगते हैं। ये चैटबॉट्स सुनते हैं, जवाब देते हैं और व्यक्ति को अकेलापन महसूस नहीं होने देते।
क्या यह एक मानसिक बीमारी है?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, फिक्टोसेक्सुअलिटी कोई बीमारी नहीं है। यह किसी व्यक्ति की यौन पहचान का एक रूप हो सकता है, जैसे किसी को किसी खास जेंडर या किसी खास तरह के लोगों की ओर आकर्षण होता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह एसेक्सुअलिटी (Asexuality) जैसी व्यापक पहचान का हिस्सा भी हो सकती है।
कई लोग समाज के बनाए गए रिश्तों, शादी के दबाव और जेंडर नियमों से दूर रहना चाहते हैं।ऐसे लोग फिक्टोसेक्सुअलिटी में खुद को ज्यादा सुरक्षित और आजाद महसूस करते हैं। यहां उन्हें किसी तरह की सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ नहीं उठाना पड़ता।
क्या यह सही या गलत है?
इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है। जब तक कोई व्यक्ति खुद खुश है, किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा और अपनी जिंदगी को संतुलित तरीके से जी रहा है, तब तक इसे गलत नहीं कहा जा सकता।











