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30 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी तेज गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को चौंका दिया। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अचानक आई इस गिरावट ने पूरे बुलियन मार्केट को हिला कर रख दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर स्थानीय सर्राफा बाजार तक, हर जगह कीमतों में भारी टूट दर्ज की गई।
सर्राफा बाजार में शुक्रवार को जो हुआ, उसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की थी। चांदी की कीमतों में एक ही दिन में एक लाख रुपए से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना करीब 33,000 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया। इस बड़ी टूट के चलते बाजार विश्लेषकों ने इस दिन को कीमती धातुओं के लिए ‘ब्लैक फ्राइडे’ करार दिया।
शुक्रवार सुबह बाजार खुलने से पहले ही MCX पर कमजोरी के संकेत साफ नजर आए। सोना करीब 578 रुपए टूटकर 1,49,075 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। वहीं मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 2,91,922 रुपए प्रति किलो पर ट्रेड करती दिखी। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब बीते दिनों सोना-चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे थे।
केवल घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने-चांदी में बड़ी गिरावट देखी गई। अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 5,480 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर से फिसलकर करीब 4,763 डॉलर प्रति औंस तक आ गया, यानी 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट। वहीं चांदी, जिसने 118 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ था, 30 फीसदी से अधिक टूटकर 78 डॉलर के आसपास पहुंच गई।
तेज गिरावट के बाद स्थानीय बाजार में 24 कैरेट सोना करीब 1,60,580 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,47,200 रुपए और 18 कैरेट सोना 1,20,440 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। चांदी की कीमतें भी टूटने के बावजूद करीब 3,40,000 रुपए प्रति किलो के स्तर पर बनी हुई हैं।
बाजार जानकारों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई अहम वजहें हैं।
पहला कारण है मुनाफावसूली। जब कीमतें अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंचीं, तो निवेशकों ने जमकर मुनाफा निकाला। दूसरा कारण डॉलर की मजबूती है। अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में तेजी आने से सोने-चांदी की मांग कमजोर पड़ी, क्योंकि डॉलर मजबूत होने पर कमोडिटी महंगी हो जाती है। तीसरा बड़ा कारण वैश्विक सेंटिमेंट में बदलाव है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व में नेतृत्व बदलाव की चर्चाओं ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को प्रभावित किया।
अब सभी की नजरें 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बजट में सोने की इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार में बड़ी हलचल की संभावना कम है। अगर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है, तो सोने में 5,000 से 8,000 रुपए तक की और गिरावट आ सकती है।
केडिया एडवाइजरी के अनुसार, हालिया तेजी जरूरत से ज्यादा हो चुकी थी, इसलिए करेक्शन तय माना जा रहा था। चांदी का बाजार आकार में छोटा और ज्यादा अस्थिर होता है, इसलिए इसमें गिरावट भी ज्यादा तेज दिखती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो बजट के बाद का रुख देखना ज्यादा समझदारी होगी।