Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
नई दिल्ली। उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यूपीआई की तेज़ होती ग्रोथ का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि घरेलू डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक यूपीआई के जरिए कुल 230 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा 139 लाख करोड़ रुपये था। मंत्री ने कहा कि यह बढ़ोतरी देश में डिजिटल भुगतान को लेकर बढ़ते भरोसे और तकनीकी पहुंच को दर्शाती है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लिखित उत्तर में बताया कि यूपीआई अब भारत तक सीमित नहीं रहा है। मुद्रा रूपांतरण और संबंधित देशों के कानूनों का पालन करते हुए यूपीआई का इस्तेमाल फिलहाल आठ देशों—भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात—में किया जा रहा है। सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड मिलकर यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को और गति देने पर काम कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि IMF की जून 2025 की रिपोर्ट में यूपीआई को लेनदेन के अनुपात के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली बताया गया है। वहीं ACI Worldwide की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रियल-टाइम रिटेल पेमेंट्स में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है। सीमा-पार पी2पी और पी2एम भुगतान के लिए विशेष कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं, जिससे यूपीआई की वैश्विक पकड़ और मजबूत हो रही है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत भारत में 11 अप्रैल 2016 को हुई थी। इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मार्गदर्शन में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया। यूपीआई का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को आसान, तेज़ और सुरक्षित बनाना था। इस प्रणाली के जरिए उपयोगकर्ता मोबाइल फोन के माध्यम से तुरंत बैंक खातों के बीच धनराशि ट्रांसफर कर सकते हैं। शुरुआत में कुछ चुनिंदा बैंकों तक सीमित रहने वाला यूपीआई धीरे-धीरे पूरे देश में लोकप्रिय हुआ। आज यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है और करोड़ों लोग रोज़ाना इसके जरिए लेनदेन कर रहे हैं।