
भोपाल। मध्यप्रदेश का श्रम विभाग श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर निरंतर 'नये नवाचार तथा विचार' पर काम कर रहा है। इसी दिशा में श्रम विभाग के अनूठे कॉन्सेप्ट हर्ट फ्री डेज (Hurt Free Days) के अच्छे परिणाम निकलकर सामने आ रहे हैं।
इस पहल के तहत 'चोट रहित दिवस/दुर्घटना शून्य दिवस' की जानकारी कारखानों में सूचना पटल पर प्रदर्शित कराई जा रही है। इससे पता चलता रहता है कि कार्यस्थल पर कामगारों की सुरक्षा को लेकर नियमों और जिम्मेदारियों का कितना पालन किया जा रहा है। इसका मकसद कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं को रोकना है। इन सुरक्षित प्रक्रियाओं/प्रबंधनों के पालन से यह पता भी चलता है कि लगातार कितने दिनों तक चोट रहित दिवस/दुर्घटना शून्य दिवस (Hurt Free Days) बनाये रखने में कारखाना प्रबंधन को सफलता मिली है।
श्रम विभाग के अनुसार कोई दुर्घटना होने या किसी सुरक्षा प्रावधान का उल्लंघन पाए जाने पर; जिस कारण दुर्घटना हुई या आशंका हो सकती थी; उसे संभावित दुर्घटना (Hurt) मान कर हर्ट फ्री डेज (Hurt Free Days ) की गणना दुबारा शून्य से शुरू की जाती है, जिससे कमियों को सुधारा जा सके एवं सुरक्षा इंतजाम और पुख्ता किए जा सकें।
श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल कहते हैं कि यह पहल कारखानों में श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रबंधन को और बेहतर बनाने में सहायक साबित हो रही है। निश्चय ही मध्य प्रदेश श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक सशक्त उदाहरण बनेगा।
उल्लेखनीय है कि भवन और अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 के तहत कार्यस्थल पर कामगारों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे-रैंप, पेयजल, उचित औजार और सामग्री आदि।