आजादी से पहले भी था बजट!जानिए किसने पेश किया था भारत का पहला बजट

भारत में बजट का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी है। आज जब हर साल 1 फरवरी को बजट का इंतजार होता है, तब शायद ही लोग जानते हों कि देश में बजट की शुरुआत कब हुई और उस दौर में टैक्स के नियम कैसे थे। आज के मुकाबले तब टैक्स सिस्टम बिल्कुल अलग था।
भारत में बजट की शुरुआत कब हुई
भारत के बजट इतिहास को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है- आजादी से पहले और आजादी के बाद। बहुत से लोगों को लगता है कि भारत का पहला बजट आजादी के बाद पेश हुआ था, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में पहला बजट आजादी से करीब 87 साल पहले पेश किया गया था।
अंग्रेजों के समय का पहला बजट
भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। यह बजट स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री और राजनेता जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जेम्स विल्सन वही व्यक्ति थे जिन्होंने मशहूर पत्रिका The Economist और Standard Chartered Bank की स्थापना की थी। 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। इसी नुकसान की भरपाई के लिए भारत में पहली बार इनकम टैक्स लागू करने का फैसला लिया गया।
उस दौर में किसे देना पड़ता था टैक्स
1860 में टैक्स के नियम आज के मुकाबले काफी सरल थे। उस समय तय किया गया था कि जिन लोगों की सालाना आय 200 रुपए से कम है, उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। जिनकी आय 200 से 500 रुपए के बीच है, उनसे 2% टैक्स लिया जाएगा और जिनकी आय 500 रुपए से ज्यादा है, उन्हें 4% टैक्स देना होगा। हालांकि उस समय इनकम टैक्स का काफी विरोध हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस सिस्टम के आदी होते चले गए।
आजाद भारत का पहला बजट
भारत को आजादी मिलने के बाद पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने संसद में रखा था। यह बजट एक अंतरिम बजट था, जो सिर्फ 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के लिए बनाया गया था। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था। उस समय भारत का कुल बजट राजस्व करीब 171.15 करोड़ रुपए था।
टैक्स छूट का बदलता इतिहास
समय के साथ भारत में टैक्स छूट की सीमा और टैक्स सिस्टम में कई बदलाव हुए। कुछ अहम पड़ाव इस तरह हैं-
- 1950: गणतंत्र बनने के बाद पहला बजट पेश किया गया। उस समय 1500 रुपए तक की आय टैक्स फ्री थी।
- 1955-56: शादीशुदा और अविवाहित लोगों के लिए अलग-अलग टैक्स छूट तय की गई। शादीशुदा व्यक्ति को 2000 रुपए तक और अविवाहित को 1000 रुपए तक टैक्स से राहत मिलती थी।
- 1970 का दशक: यह टैक्स इतिहास का सबसे कठोर दौर माना जाता है। साल 1973-74 में सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब पर टैक्स दर 97.5% तक पहुंच गई थी।
- 1985: राजीव गांधी सरकार ने टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया। शादीशुदा और अविवाहित के बीच का फर्क खत्म कर सभी के लिए एक समान टैक्स स्लैब लागू किया गया।
बजट से जुड़ी कुछ रोचक बातें
भारत के बजट से जुड़े कुछ बदलाव भी काफी दिलचस्प रहे हैं-
- बजट पेश करने का समय: पहले बजट शाम 5 बजे पेश होता था। साल 2001 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया।
- भाषा का बदलाव: 1955 तक बजट केवल अंग्रेजी में पेश किया जाता था। इसके बाद इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पेश किया जाने लगा।
- ब्रीफकेस की परंपरा: साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के साथ आने वाले ब्रीफकेस की परंपरा खत्म कर ‘बही-खाता’ की शुरुआत की।
बजट 2026 की तैयारी
अब एक बार फिर देश की नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वतंत्र भारत का 94वां बजट पेश करेंगी। बजट के इस लंबे सफर ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और आगे भी यह देश के विकास की नींव रखता रहेगा।



















