Manisha Dhanwani
31 Jan 2026
भारत में बजट का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी है। आज जब हर साल 1 फरवरी को बजट का इंतजार होता है, तब शायद ही लोग जानते हों कि देश में बजट की शुरुआत कब हुई और उस दौर में टैक्स के नियम कैसे थे। आज के मुकाबले तब टैक्स सिस्टम बिल्कुल अलग था।
भारत के बजट इतिहास को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है- आजादी से पहले और आजादी के बाद। बहुत से लोगों को लगता है कि भारत का पहला बजट आजादी के बाद पेश हुआ था, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में पहला बजट आजादी से करीब 87 साल पहले पेश किया गया था।
भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। यह बजट स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री और राजनेता जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जेम्स विल्सन वही व्यक्ति थे जिन्होंने मशहूर पत्रिका The Economist और Standard Chartered Bank की स्थापना की थी। 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। इसी नुकसान की भरपाई के लिए भारत में पहली बार इनकम टैक्स लागू करने का फैसला लिया गया।
1860 में टैक्स के नियम आज के मुकाबले काफी सरल थे। उस समय तय किया गया था कि जिन लोगों की सालाना आय 200 रुपए से कम है, उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। जिनकी आय 200 से 500 रुपए के बीच है, उनसे 2% टैक्स लिया जाएगा और जिनकी आय 500 रुपए से ज्यादा है, उन्हें 4% टैक्स देना होगा। हालांकि उस समय इनकम टैक्स का काफी विरोध हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस सिस्टम के आदी होते चले गए।
भारत को आजादी मिलने के बाद पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने संसद में रखा था। यह बजट एक अंतरिम बजट था, जो सिर्फ 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के लिए बनाया गया था। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था। उस समय भारत का कुल बजट राजस्व करीब 171.15 करोड़ रुपए था।
समय के साथ भारत में टैक्स छूट की सीमा और टैक्स सिस्टम में कई बदलाव हुए। कुछ अहम पड़ाव इस तरह हैं-
भारत के बजट से जुड़े कुछ बदलाव भी काफी दिलचस्प रहे हैं-
अब एक बार फिर देश की नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वतंत्र भारत का 94वां बजट पेश करेंगी। बजट के इस लंबे सफर ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और आगे भी यह देश के विकास की नींव रखता रहेगा।