DGCA बदल सकता है ये नियम! क्या अब हर साल होगा पायलटों का डोप टेस्ट? पायलटों के लिए सरकार क्यों बदल रही नियम

नई दिल्ली। पायलटों की फिटनेस और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार अब डोप टेस्टिंग के नियम और सख्त करने पर विचार कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने DGCA को मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने और जरूरत के मुताबिक बदलाव सुझाने को कहा है। फिलहाल नियमों के तहत फ्लाइट क्रू की रैंडम जांच होती है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक सालाना रैंडम टेस्टिंग का दायरा मौजूदा व्यवस्था से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से ज्यादा किया जा सकता है। इस बीच पायलटों के संगठन ने भी जांच बढ़ाने का सुझाव दिया है।
एयर इंडिया की घटना के बाद बढ़ी चिंता
डोप टेस्टिंग को लेकर चर्चा तेज होने की बड़ी वजह 4 अगस्त को हुई एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI2379 की घटना है। उड़ान के दौरान विमान ने अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। विमान बाद में संभल गया और सुरक्षित दिल्ली पहुंचा। इस घटना में यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों को चोटें आई थीं। सरकारी जानकारी के मुताबिक विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे। मामले की जांच अभी जारी है।
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पायलट की जांच रिपोर्ट ने बढ़ाए सवाल
घटना के बाद दोनों पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग कराई गई। पायलट-इन-कमांड की शुरुआती जांच में ऐसा परिणाम आया, जिसके बाद सैंपल को पुष्टि के लिए भेजा गया। बाद की रिपोर्ट में मारिजुआना की पुष्टि होने की बात सामने आई। जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया था। हालांकि, विमान के अचानक ऊंचाई खोने की वजह सिर्फ इस मेडिकल रिपोर्ट को मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि तकनीकी और ऑपरेशनल पहलुओं की भी जांच चल रही है।
क्या हर पायलट का साल में एक बार टेस्ट होगा?
यही सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकार मौजूदा रैंडम टेस्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर विचार कर रही है। अभी हर पायलट का हर साल टेस्ट होना तय नियम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार सरकार रैंडम टेस्टिंग का हिस्सा बढ़ाकर 25 प्रतिशत से ज्यादा करने पर विचार कर सकती है। इसलिए इसे सीधे सभी पायलटों के सालाना अनिवार्य डोप टेस्ट का अंतिम फैसला कहना अभी जल्दबाजी होगी।
पायलटों के संगठन ने भी दिया सुझाव
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने DGCA को नियमों में बदलाव का सुझाव दिया है। संगठन ने सालाना रैंडम ड्रग टेस्टिंग का दायरा कम से कम 25 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके अलावा उसने यूरिन टेस्ट के साथ ओरल-फ्लूइड टेस्ट को भी शामिल करने का सुझाव दिया है। पायलटों के संगठन का कहना है कि इससे जांच की क्षमता बढ़ सकती है और नशीले पदार्थों की पहचान के लिए अतिरिक्त तरीका मिल सकता है।
एयर इंडिया ने अपने स्तर पर बढ़ाई जांच
सरकार के फैसले का इंतजार करने के साथ एयर इंडिया ने अपने स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने सभी पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस और प्रतिबंधित दवाओं से जुड़ी जांच शुरू करने का फैसला किया। यह कदम मौजूदा नियामकीय जरूरत से आगे का है। कंपनी ने 13 अगस्त से इस जांच की शुरुआत की थी।
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सिर्फ डोप टेस्ट नहीं, तकनीकी जांच भी जारी
फुकेत-दिल्ली घटना की जांच केवल पायलटों की मेडिकल रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। विमान के सिस्टम, फ्लाइट डेटा, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और कॉकपिट से जुड़ी जानकारी की भी जांच की जा रही है। सरकारी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उड़ान के दौरान विमान ने अचानक ऊंचाई क्यों खोई। इसलिए डोप टेस्ट से जुड़ी जानकारी को पूरी घटना का अकेला कारण मानना जांच पूरी होने से पहले सही नहीं होगा।




















