Raipur:CM हाउस में आज गूंजेगा हरेली का उल्लास, सजेगा छत्तीसगढ़ी रंग

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पहले लोकपर्व हरेली तिहार का रंग आज मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में नजर आएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हरेली के अवसर पर हल-नांगर और कृषि उपकरणों की पूजा करेंगे। सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले आयोजन में गेड़ी चढ़ने, पारंपरिक खेलों और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
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CM हाउस में दिखेगा गांव का रंग
मुख्यमंत्री निवास में होने वाले हरेली तिहार के आयोजन को छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश की थीम पर सजाया जाएगा। यहां कृषि उपकरणों, पारंपरिक वस्तुओं और लोक संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन के जरिए राजधानी में गांव और खेत-किसानी की संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

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साय करेंगे हल-नांगर की पूजा
हरेली के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पारंपरिक रूप से हल-नांगर और कृषि उपकरणों की पूजा करेंगे। किसानों के लिए कृषि औजार केवल खेती के साधन नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और जीवन का अहम हिस्सा हैं। हरेली पर इनकी पूजा कर अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
गेड़ी पर चढ़ेगा उत्सव का रंग
हरेली का जिक्र हो और गेड़ी की बात न हो, ऐसा संभव नहीं। मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी चढ़ने के साथ पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण मनोरंजन को सामने लाने की कोशिश होगी।

खेती से जुड़ा है हरेली का इतिहास
हरेली छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषि पर्वों में शामिल है। सावन के दौरान मनाए जाने वाले इस त्योहार में किसान अपने खेत, कृषि उपकरण और फसल से जुड़ी परंपराओं को विशेष महत्व देते हैं। हल-नांगर सहित अन्य औजारों की साफ-सफाई कर पूजा की जाती है।
नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री निवास में होने वाला यह आयोजन केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन से परिचित कराने का प्रयास भी किया जाएगा। पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनेंगी।

संस्कृति और कृषि विभाग की संयुक्त तैयारी
हरेली तिहार का यह आयोजन संस्कृति विभाग और कृषि विभाग की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा। आयोजन में कृषि-किसानी से जुड़ी परंपराओं के साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को प्रमुखता दी जाएगी।












