PU Special :2047 का भोपाल बदलेगा शहर का ढांचा, घर और कारोबार के बीच नई लकीर खींचेगा मास्टर प्लान

भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट 21 साल बाद सामने आया है। 1016.90 वर्ग किमी में 254 गांव शामिल हैं। 51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर, 27 फीसदी ग्रीन एरिया और 70 फीसदी सहमति से अपार्टमेंट री-डेवलपमेंट का प्रस्ताव है।
2047 का भोपाल बदलेगा शहर का ढांचा, घर और कारोबार के बीच नई लकीर खींचेगा मास्टर प्लान
2047 का भोपाल बदलेगा शहर का ढांचा

भोपाल। राजधानी भोपाल के नए मास्टर प्लान का 2047 का ड्राफ्ट करीब 21 साल के इंतजार के बाद सामने आ गया है। यह सिर्फ सड़कों, कॉलोनियों और जमीन के इस्तेमाल का नक्शा नहीं है, बल्कि अगले 21 साल में शहर किस दिशा में बढ़ेगा, इसका पूरा खाका तैयार करता है। इसमें आवासीय इलाकों के साथ कारोबार, रोजगार, परिवहन, हरित क्षेत्र और पुराने क्षेत्रों के पुनर्विकास को लेकर अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।

1016.90 वर्ग किलोमीटर के प्लानिंग एरिया में 254 गांवों को शामिल किया गया है। करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में 61017.02 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र का प्रावधान किया गया है। नए मास्टर प्लान का फोकस सिर्फ शहर का विस्तार करने पर नहीं है। इसमें घर, कामकाज, रोजगार, सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरण को एक साथ जोड़कर विकास का ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि ड्राफ्ट में मिक्स्ड लैंड यूज, सड़क की चौड़ाई के आधार पर एफएआर, पुराने अपार्टमेंट के री-डेवलपमेंट और बड़े ग्रोथ कॉरिडोर जैसे प्रावधान खास चर्चा में हैं।

मिक्स्ड लैंड यूज से घर और कारोबार का अंतर होगा कम

मास्टर प्लान 2047 के सबसे अहम प्रस्तावों में मिक्स्ड लैंड यूज शामिल है। सड़क की चौड़ाई के आधार पर ऐसे क्षेत्रों का प्रावधान किया गया है, जहां आवासीय और कामकाज से जुड़ी गतिविधियों को पूरी तरह अलग-अलग नहीं रखा जाएगा। इसका मतलब यह है कि भविष्य में कई इलाकों में घर के आसपास ही दुकान, कार्यालय और रोजगार से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए जगह मिल सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य घर और काम की दूरी कम करना, सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास को बढ़ावा देना और शहर में यात्रा का दबाव घटाना है।

सीलिंग झेल रहे कारोबारियों की नजर भी इस प्रावधान पर

रहवासी क्षेत्रों में कारोबार को लेकर चल रही सीलिंग कार्रवाई के बीच मिक्स्ड लैंड यूज का यह प्रावधान कारोबारियों के लिए खास महत्व रखता है। हालांकि ड्राफ्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पहले से चल रहे कारोबार अपने आप वैध हो जाएंगे। यानी नया मास्टर प्लान भविष्य में जमीन के इस्तेमाल की दिशा तय करेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा सीलिंग या कार्रवाई पर तत्काल रोक लग जाएगी। कारोबारियों के लिए यह भविष्य की व्यवस्था में राहत की उम्मीद हो सकती है लेकिन फिलहाल किसी मौजूदा कार्रवाई पर इसका सीधा असर नहीं माना जा सकता।

चौड़ी सड़क पर ज्यादा एफएआर और ऊंची इमारतों की गुंजाइश

ड्राफ्ट में सड़क की चौड़ाई के आधार पर एफएआर तय करने का प्रस्ताव है। चौड़ी सड़कों से लगी जमीनों पर ज्यादा एफएआर और भवन की ऊंचाई के लिहाज से अधिक गुंजाइश देने की व्यवस्था रखी गई है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, व्यवस्थित तरीके से ज्यादा निर्माण की अनुमति देने और निवेश को बढ़ावा देने का रास्ता तैयार हो सकता है। साथ ही विकास से जुड़े नियमों को आसान बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि आम नागरिक और डेवलपर दोनों के लिए निर्माण संबंधी प्रावधानों को समझना और उनका पालन करना आसान हो।

70 फीसदी रहवासियों की सहमति से अपार्टमेंट री-डेवलपमेंट

पुराने विकसित क्षेत्रों और अपार्टमेंट के पुनर्विकास के लिए भी ड्राफ्ट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसमें प्लॉट मर्जर, बेस एफएआर में छूट समेत अन्य री-डेवलपमेंट प्रावधान शामिल हैं। प्रस्ताव के अनुसार यदि किसी रिहायशी अपार्टमेंट के 70 फीसदी रहवासी सहमत होते हैं तो आरडब्ल्यूए को रेजिडेंशियल अपार्टमेंट के पुनर्विकास की अनुमति देने का प्रावधान रखा गया है। इससे पुराने और जर्जर अपार्टमेंट को नए सिरे से विकसित करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। खास तौर पर ऐसे इलाकों में जहां लंबे समय से पुराने भवनों के पुनर्निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है, यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रीन एरिया बढ़ाकर करीब 27 फीसदी करने का प्रस्ताव

भोपाल की पहचान उसकी झीलों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों से जुड़ी रही है। नए मास्टर प्लान में पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। 2005 के प्लान में करीब 16 फीसदी ग्रीन एरिया था, जिसे 2047 के ड्राफ्ट में बढ़ाकर करीब 27 फीसदी करने का प्रस्ताव है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र का हिस्सा भी 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने की योजना है। कुल लैंड यूज में 43.85 फीसदी रेजिडेंशियल, 4.01 फीसदी मिक्स्ड यूज, 2.21 फीसदी कमर्शियल, 3.50 फीसदी इंडस्ट्रियल और 27.01 फीसदी ग्रीन एरिया रखा गया है। वहीं 9.53 फीसदी जमीन ट्रांसपोर्ट के लिए प्रस्तावित की गई है।

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51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर बनेगा नई विकास धुरी

मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। यह करीब 51 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा और भविष्य में भोपाल के विकास की एक महत्वपूर्ण धुरी के रूप में काम करने की योजना है। प्रस्तावित कॉरिडोर में एयरपोर्ट, सीएमयू, लॉजिस्टिक हब, होलसेल ट्रेड सेंटर और शहर के अलग-अलग सबर्ब को जोड़ने की योजना है। यहां मिक्स्ड यूज के साथ हाई डेंसिटी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कॉरिडोर में होटल, हॉस्पिटेलिटी, हेल्थ सर्विस, ट्रेड, आईटी, एआई, डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक, होलसेल मार्केट, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और हाउसिंग जैसी गतिविधियों को विकसित करने की योजना है। इससे रोजगार के नए केंद्र तैयार करने और शहर के अलग-अलग हिस्सों को एक ही विकास नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की गई है।

झील, जंगल, पहाड़ी और जलाशयों के संरक्षण पर जोर

मास्टर प्लान की बुनियाद चार प्रमुख स्तंभों पर रखी गई है। इनमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी प्लानिंग, सुधार आधारित प्लानिंग और आत्मनिर्भर आर्थिक विकास शामिल हैं। भोपाल ताल यानी बड़े तालाब और उसके कैचमेंट एरिया के साथ शहर की पहाड़ियों, जंगल क्षेत्रों, तालाबों और जलाशयों को संरक्षित रखने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। इसका उद्देश्य शहर के विकास के साथ उसकी प्राकृतिक पहचान को बनाए रखना है ताकि भविष्य में बढ़ती आबादी और निर्माण के दबाव के बावजूद जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों पर असर कम हो।

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घर, कारोबार और रोजगार को एक साथ जोड़ने की कोशिश

2047 का यह ड्राफ्ट भोपाल के विकास को अलग-अलग हिस्सों में बांटने के बजाय उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर देता है। मिक्स्ड लैंड यूज के जरिए आवास और रोजगार को करीब लाने का प्रस्ताव है जबकि ग्रोथ कॉरिडोर के जरिए बड़े कारोबारी और रोजगार केंद्र विकसित करने की योजना है। वहीं पुराने इलाकों के री-डेवलपमेंट, सड़क की चौड़ाई के आधार पर एफएआर और ग्रीन एरिया बढ़ाने जैसे प्रावधान शहर के मौजूदा ढांचे को व्यवस्थित करने की दिशा में रखे गए हैं।

एक नजर में भोपाल विकास योजना-2047

  • प्लानिंग एरिया: 1016.90 वर्ग किलोमीटर
  • प्लान में शामिल गांव: 254
  • अनुमानित आबादी: करीब 45 लाख
  • विकसित क्षेत्र: 61017.02 हेक्टेयर
  • ग्रोथ कॉरिडोर का क्षेत्र: करीब 3000 हेक्टेयर
  • ग्रोथ कॉरिडोर की लंबाई: 51 किलोमीटर
  • ग्रीन एरिया: 27.01 फीसदी
  • रेजिडेंशियल लैंड यूज: 43.85 फीसदी
  • मिक्स्ड यूज: 4.01 फीसदी
  • कमर्शियल: 2.21 फीसदी
  • इंडस्ट्रियल: 3.50 फीसदी
  • ट्रांसपोर्ट: 9.53 फीसदी
  • कॉलोनी स्तर पर ओपन एरिया: 12 फीसदी प्रस्तावित

भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट अब शहर के भविष्य के विकास, निर्माण और जमीन के इस्तेमाल की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बनने जा रहा है। इसमें एक तरफ नए इलाकों के विकास का खाका है तो दूसरी ओर पुराने क्षेत्रों के पुनर्विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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